वनडे विश्व कप 2023 में भारत का तीसरा मैच पाकिस्तान के साथ है। इस मुकाबले में दोनों टीमें जीत हासिल करना चाहेंगी। दुनियाभर के क्रिकेट फैंस को इन दोनों टीमों के बीच मैच का इंतजार रहता है। इसी वजह से इस मुकाबले का दबाव और मैच के दौरान तनाव अलग स्तर का होता है। इस वजह से कई बार खिलाड़ियों के बीच आपस में बातचीत या लड़ाई भी हो जाती है। अब क्रिकेटर काफी संयमित हो चुके हैं और अपनी भावनाओं को काबू में रखते हैं, लेकिन कई बार कुछ खिलाड़ी अपना आपा खो देते हैं। यहां हम भारत और पाकिस्तान मुकाबलों के ऐसे ही कुछ विवादों के बारे में बता रहे हैं।
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2022: भारतीय बल्लेबाजों को घूरते रहे नसीम शाह
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नसीम शाह
- फोटो : सोशल मीडिया
2022 एशिया कप में पाकिस्तान के नसीम शाह पाकिस्तान के लिए पहला टी20 मैच खेल रहे थे। उन्होंने शानदार शुरुआत की और भारतीय बल्लेबाजों को जमकर परेशान किया। वह अपनी शानदार गेंदों के साथ भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर रहे थे और गेंद करने के बाद उन्हें घूर भी रहे थे। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों ने उनसे उलझने की बजाय अपने खेल पर ध्यान दिया। छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और हार्दिक पांड्या ने छक्का लगाकर भारत को जीत दिला दी। इसके बाद नसीम शाह रोते हुए मैदान से वापस गए थे।
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2010: गंभीर-कामरान एक दूसरे से भिड़े
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गौतम गंभीर और कामरान अकमल
- फोटो : सोशल मीडिया
इनके अलावा एक और घटना है जो 2010 में काफी चर्चाओं में रहा था। दरअसल, 2010 एशिया कप के दौरान श्रीलंका के दाम्बुला में भारत-पाकिस्तान की टक्कर हुई थी। स्पिनर सईद अजमल की गेंद गंभीर के बैट को मिस करते हुए विकेटकीपर कामरान अकमल के हाथों में गई थी। इसके बाद कामरान खुशी के मारे अपील करने पिच तक आ पहुंचे।
हालांकि, अंपायर ने अपील को नकार दिया और गंभीर नॉटआउट रहे। इसके बाद ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान गंभीर और कामरान में तूतू-मैंमैं शुरू हुई और दोनों एक दूसरे के नजदीक पहुंच गए थे। तब फील्ड अंपायर बिली बाउडन ने कामरान को और नॉन स्ट्राइकर एंड पर मौजूद महेंद्र सिंह धोनी ने गंभीर को एक दूसरे से दूर किया।
इसी मैच में पाकिस्तान ने भारत को 267 रन का लक्ष्य दिया था। तब भारत को लक्ष्य का पीछा करते हुए आखिरी ओवर में सात रन की जरूरत थी। उस वक्त भारत का कोई मुख्य बल्लेबाज क्रीज पर नहीं था। आखिरी ओवर फेंकने मोहम्मद आमिर आए। इस ओवर में हरभजन ने एक गेंद मिस किया तो तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने स्लेजिंग शुरू कर दिया।
हालांकि, हरभजन ने आमिर की गेंद पर छक्का लगाकर भारत को मैच जिता दिया और साथ में आक्रामक तरीके से जीत जश्न भी मनाते दिखे थे। यह बात शोएब अख्तर को रास नहीं आई थी और वह बाद में भज्जी से बात करते भी दिखे थे।
2007: गंभीर और आफरीदी के बीच तीखी नोंक-झोंक
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गौतम गंभीर और शाहिद अफरीदी
2007 में कानपुर वनडे के दौरान गौतम गंभीर और शाहिद आफरीदी एक दूसरे से बीच मैदान पर भिड़ गए थे। इसकी तस्वीर आज भी लोगों के जहन में है। दरअसल हुआ यूं कि गंभीर ने आफरीदी की एक गेंद पर चौका लगाया और अगली ही गेंद पर सिंगल लेने के लिए दौड़ पड़े।
जब गंभीर रन लेने के लिए दौड़ रहे थे, तब अफरीदी उनके रास्ते में आ गए और दोनों के बीच टक्कर हो गई थी। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच जमकर नोंक-झोंक हुई। फील्ड अंपायर ने किसी तरह इस मामले को सुलझाया। मैच के बाद रेफरी रोशन महानामा ने आफरीदी पर मैच फीसदी का 95 और गंभीर पर 65 फीसदी जुर्माना लगाया था।
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2003 विश्व कप: छुरी-कांटा लेकर यूसुफ से भिड़े भज्जी
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हरभजन सिंह और मोहम्मद यूसुफ
- फोटो : सोशल मीडिया
2003 विश्व कप का सेंचुरियन मैच हमेशा सचिन तेंदुलकर की 98 रन की पारी और पाकिस्तान पर भारत की जीत के लिए याद किया जाता है। मगर इसी मैच के दौरान हरभजन सिंह (भज्जी) और मोहम्मद यूसुफ के बीच शुरू हुआ एक मजाक मारपीट की नौबत तक जा पहुंचा था।
भज्जी ने उस दिन के बारे में बात करते हुए कहा कि, 'लंच के समय मैं एक टेबल पर बैठा था और यूसुफ-शोएब अख्तर दूसरे टेबल पर बैठे थे। हम दोनों पंजाबी बोलते हैं और एक दूसरे की खिंचाई कर रहे थे, तब अचानक उसने निजी टिप्पणी कर दी और फिर मेरे धर्म के बारे में कुछ बोला।’
हरभजन ने हंसते हुए कहा, ‘फिर मैंने भी तुरंत ऐसा ही करारा जवाब दिया। इससे पहले कि कोई समझ पाता, हम दोनों के हाथ में ‘छुरी-कांटे’ थे और हम अपनी कुर्सी से उठकर एक दूसरे पर वार करने के लिए तैयार थे, लेकिन जब यह घटना हुई थी तब यह इतनी हास्यास्पद नहीं लग रही थी।
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1996 विश्व कप: वेंकटेश ने सोहेल को पवेलियन भेजा
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वेंकटेश प्रसाद और सोहेल
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बात 1996 विश्व कप के क्वार्टरफाइनल की है। पाकिस्तान 287 के लक्ष्य का पीछा कर रहा था। पाकिस्तान के बल्लेबाज आमिर सोहेल ने वेंकटेश की गेंद पर चौका मारा और वेंकटेश की ओर देखते हुए उंगली से इशारा किया। शायद यह चुनौती दे रहे थे कि तुम अगली गेंद फेंको, मैं फिर चौका मारूंगा।
वेंकटेश भी ताव में थे। अगली गेंद पर वह ओवर द विकेट गेंदबाजी करने की जगह राउंड द विकेट आए और अगली गेंद पर सोहेल को क्लीन बोल्ड कर दिया। उसके बाद सोहेल को उन्हीं के अंदाज में उंगली दिखाते हुए पवेलियन लौटने का इशारा किया। इस घटना को शायद ही किसी फैन ने भूला होगा।
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1992 विश्व कप: जंपिंग जैक मियांदाद
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जावेद मियांदाद कूदते हुए
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ऑस्ट्रेलिया में 1992 के विश्व कप में जावेद मियांदाद बल्लेबाजी कर रहे थे। भारत ने पाकिस्तान को 217 रनों का लक्ष्य दिया था और जवाब में पाकिस्तान ने दो विकेट गंवा दिए थे। सचिन तेंदुलकर के एक ओवर में भारतीय विकेटकीपर किरन मोरे साथियों की हौसलाअफजाई के लिए विकेट के पीछे से बार-बार अपील कर रहे थे, जिससे मियांदाद को गुस्सा आ गया।
बीच ओवर में दोनों के बीच इसको लेकर नोकझोंक भी हुई। मियांदाद ने अंपायर से जाकर शिकायत भी की। अगली गेंद पर जब मियांदाद दो रन दौड़कर पूरे कर रहे थे तो किरन मोरे ने उनके खिलाफ रनआउट की अपील की। इस पर जावेद इतना चिढ़ गए कि क्रीज पर मेंढक की तरह उछलने लगे। इस घटना का दर्शकों ने काफी लुत्फ उठाया था। अंत में भारत ने यह मुकाबला 43 रनों से जीत लिया था।
यह घटना तीन नवंबर 1978 की है। उन दिनों दो बाउंसर को लेकर वाइड का नियम भी उतना सख्त नहीं था। जफर अली स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच खेला गया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने सात विकेट खोकर 205 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने 37 ओवर्स में दो विके गंवाकर 183 रन बना लिए थे। इसके बाद पाकिस्तानी कप्तान ने 38वें ओवर में सरफराज नवाज को गेंद थमाई।
नवाज ने उस ओवर में अंशुमन गायकवाड़ को लगातार चार बांउसर गेंदें फेंकी। हालांकि, अंपायर ने एक भी बॉल को वाइड करार नहीं दिया। इससे खीजकर भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने अपने बल्लेबाजों को ड्रेसिंग रूम में बुला लिया और मैच पाकिस्तान को सौंप दिया। वनडे में यह पहला मौका था, जब किसी कप्तान ने बेईमानी करने वाली विरोधी टीम को गुस्से में जीत दे दिया था।