इन दिनों कोरोना की वैक्सीन को लेकर सफलता की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं ट्रायल कामयाब रहे हैं तो कहीं ट्रायल्स के दौर से गुजर कर वैक्सीन लगाने का कार्य भी शुरू हो चुका है। भारत में भी आने वाले कुछ महीनों में कोरोना की वैक्सीन दी जाने लगेगी।
बहरहाल, कोरोना महामारी के इस पूरे समय में खासतौर पर मार्च से लेकर दिसंबर तक इस संक्रमित बीमारी से बचने और इसे शरीर से खत्म करने के लिए आयुर्वैद की चर्चा लगातार सामने आई है। आयुर्वेद ने जहां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है वहीं कई बार तो यह काढ़े के रूप में असरदार भी सिद्ध हुआ है।
बहरहाल, कोरोना व वर्तमान में वायरस जनित कोरोना व्याधि के लगातार बढ़ते फैलाव ने जहां एक तरफ चिंता का माहौल बनाया है वहीं दूसरी तरफ भारतीय पारंपरिक जीवनशैली, स्वास्थ्य तथा औषधि प्रणालियों की महत्ता को भी उजागर किया है।
भारत सरकार द्वारा की गई सिफारिशों एवं प्रधानमंत्री जी के संदेेश से भी यह बात स्पष्ट हुई है कि इस समय आयुर्वेद को अपनाना हितकर है। आयुष मंत्रालय ने भी कोविड-19 की रोकथाम हेतु अयुर्वेदिक गाइड लाइन्स जारी की हैं।
आयुर्वेद में कोरोना जैसी जनव्यापक बीमारियों को उनके दूषित कारकों एवं लक्षणों के आधार पर जनपदोध्वंस कहा गया है। ऐसी जनव्यापक बीमारियां वायु, जल, देश, काल के प्रदूषित होने से होती हैं तथा उत्तरोत्तर घातक होती जाती हैं।
ऐसे रोगों से बचाव हेतु आंतरिक प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाना अति आवश्यक है। आयुर्वेद में स्रोतस दुष्टि या आंतरिक अवयव में उत्पन्न दोष के अनुरूप ही व्याधि की सम्प्राप्ति (पेथोजेनेसिस) होती है और सम्प्राप्ति का विघटन ही चिकित्सा है।
सरल शब्दों में कहें तो स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना ही आयुर्वेद का उद्देश्य है। आचार्यों द्वारा संहिताओं में वर्णित उपायों का सरल अर्थ लेते हुए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं। आरोग्य प्राप्ति एवं संतुलित जीवन हेतु समुचित आहार (फूड), विहार (ऐक्टिविटी), आचार (हेबिट्स) एवं विचार (थॉट्स) आवश्यक हैं।
उचित आहार के अन्तर्गत सदैव गरम पानी का सेवन करें। नींबू का सेवन करें। दही, मांस, उड़द, आदि कफवर्धक पदार्थों का अति सेवन न करें। कटु एवं कसैले पदार्थों का अधिक सेवन करें। ब्लैक टी में गुड़ मिलाकर पिएं। इससे शरीर की शुद्धि होगी और साथ ही शरीर में आयरन की पूर्ति भी होगी।
उचित विहार के अन्तर्गत पर्याप्त निद्रा लें। मल-मूत्र के आए हुए वेगों को धारण न करें। ए.सी. का उपयोग न करें। बाहर से लाई वस्तुओं को अनावश्यक रूप से फ्रिज में न रखें। फल एवं सब्जियों को गर्म पानी से अच्छी प्रकार धोकर ही उपयोग करें।
बाहर जाते समय सिन्थेटिक तथा पूरी आस्तीन के कपड़े पहने और साथ ही मास्क एवं दस्ताने भी पहनें। हाथ मिलाना, गले लगना आदि बंद करें और नमस्कार करें। उचित आचार के अन्तर्गत सदाचार अर्थात सद्वृत्त पालन करें।