संगम से लेकर बलुआ घाट की बारादरी तक दीपमालाओं के स्वर्णहार गूंथे गए
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देव दीपवली
- फोटो : prayagraj
घाटों, मंदिरों में हाथ-हाथ से दीया-बाती जलाने की होड़ मंगवार की शाम इसी तरह संगम तट से लेकर गंगा-यमुना के किनारों पर मची।
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dev deepawali
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अकबर के किले में स्थित पातालपुरी, लेटे हनुमान, वेणी माधव, नागवासुकि, दशाश्वमेध घाट तक दीपोत्सव की लड़ियां सजीं तो एक बारगी लगा कि जैसे धरा पर स्वर्ग उतर आया हो।
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देव दीपावली
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बलुआघाट पर महीने भर से चल रहे दीपदान की आखिरी निशा कार्तिक पूर्णिमा की सांझ ढलते ही अनगिनत दीपों से जगमगा उठी।
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देव दीपावली
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बलुआ घाट बारादरी पर कतारबद्ध दीपों की लड़ियां देखते बन रही थीं।
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dev deepawali
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घाट की सीढ़ियों को दीपों और तरह-तरह की रंगोलियों से सजाया गया। मथुरा के कलाकारों ने यहां संगीतमय प्रस्तुतियों से वातावरण को और खुशनुमा बना दिया।
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देव दीपावली
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इस दौरान घाट पर जमकर आतिशबाजी हुई। फुलझड़ियों और पटाखों से खुशी का इजहार किया गया। इसी तरह सांझ ढलते ही संगम तट पर दीपों के स्वर्णहार दमकने लगे।
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देव दीपावली
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गंगा -यमुना, विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर श्रद्धालुओं ने दीपमालाएं सजाईं। कार्तिक पूर्णिमा पर देवदीपावली उत्सव को हरिहर गंगा आरती समिति की ओर से रामघाट पर यादगार बनाया गया।
बतौर मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यहां महाआरती की। डिप्टी सीएम ने पूजा अर्चना कर दीपदान किया। मां गंगा, यमुना, संरस्वती से संपूर्ण लोक के मंगल की कामना की। उन्होंने दीपोत्सव के इस महापर्व के सब प्रकार से कल्याणकारी होने की प्रार्थना की।