1 फरवरी 2014 को बाहरी बनाम पहाड़ी की लड़ाई के दबाव में कांग्रेस हाईकमान ने विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का ताज पहनाया। और यहां से शुरु हुआ हरीश रावत का सफर..
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ताज से बेताज तक हरीश रावत का सफर
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हरीश रावत
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हरीश रावत की ताजपोशी का शानदार जश्न मना। जो आज बागी बने हैं, उस दौरान जश्न में शरीक होकर उन्हें मजबूती से सरकार चलाने की हरीश रावत को बधाई दे रहे थे। रावत के बाएं ओर खड़े हरक सिंह रावत व दाएं ओर खड़ी शैला रानी रावत एवं समर्थक।
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हरीश रावत
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2013 में आई आपदा ने उत्तराखंड में पर्यटन को बेहद क्षति पहुंचाई। आपदा का वह खौफनाक मंजर लोगों के दिलों दिमाग में इस कदर बस गया कि यहां से आने से खौफ खाने लगे। ऐसे में हरीश रावत ने लोगों के मन से यह डर निकालने और उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई। आपदा के बाद केदारनाथ पहुंचे हरीश रावत ने पौराणिक ढोल दमांऊ
बजाए। और लोगों को सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश दिया।
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हरीश रावत और खली
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इस दौरान रेसलिंग मुकाबले के आयोजन ने प्रदेश को चर्चा दिलाई। द ग्रेट खली को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करते अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत।
मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते हरीश रावत। इस मुलाकात में हरीश रावत प्रधानमंत्री से उत्तरांखड की तमाम समस्याओं को लेकर बातचीत की।
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हरीश रावत और विजय बहुगुणा
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गले मिले लेकिन दिल कभी नहीं मिले। कभी दिल्लगी हुई तो कभी दिल की लगी। कहा गया है कि रूठों को मनाने में हरीश रावत को महारथ हासिल है। लेकिन हुआ उल्टा, जिन्हें गले लगाया वहीं बेवफा निकल गए। हरीश रावत, विजय बहुगुणा को नाराजगी दूर करने का कई बार प्रयास करते रहे। लेकिन रूठे बहुगुणा माने नहीं। उन्होंने रावत सरकार के खिलाफ बगावत शुरू कर दी।
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हरीश रावत
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हरीश रावत ने उन्हें मनाने की भरसक कोशिश की पर बहुगुणा नहीं माने।
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हरीश रावत और इंदिरा हृदयेश
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अक्सर नाराज रहने वाली इंदिरा हृदयेश हरीश रावत की मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ी दिखी। बागी बने विधायकों से वह हर बार यही कहती रही कि अगर कोई नाराजगी है तो उसे आपस में ही बातचीत से सुलझाया जा सकता है। लेकिन सरकार के खिलाफ इस तरह की बगावत सही नहीं।
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हरीश रावत
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मुख्यमंत्री बनने के दौरान उनके सामने आपदा से जूझ रहे उत्तराखंड को पुनः व्यवस्थित करना सबसे बड़ी चुनौती रही।
27 मार्च 2016 को हरीश रावत सत्ता से बेदखल हो गए। 'वन मैन सरकार' की तर्ज पर रावत ने दो साल एक महीने तक उत्तराखंड पर राज किया। खतरा भांपने की ऐसी चूक की कि स्टिंग में तो फंसे ही ताज गया और राजनीतिक करिअर पर भी आंच आ गई।