केजीएमयू का नर्सिंग स्टॉफ।
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सुबह से कब शाम हो जाती है, पता ही नहीं चलता
केजीएमयू के कोरोना वार्ड में अब तक आठ मरीज भर्ती हो चुके हैं। जब लोगों को कोरोना की ज्यादा जानकारी नहीं थी और सभी को प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था तभी केजीएमयू में पहली टीम उतार दी गई थी। इस टीम के सदस्यों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें भी डर लगता था, लेकिन सेवा का जज्बा कभी कम नहीं हुआ। धीरे-धीरे एक के बाद एक टीम को मौका मिला। पहली टीम के क्वारंटीन का वक्त खत्म हो चुका है और सभी स्वस्थ हैं। इससे नर्सिंग कर्मियों का हौसला दोगुना हो गया है। इन दिनों वार्ड में तैनात रेनू पटेल कहती हैं कि ड्यूटी के दौरान पूरी टीम घर से अलग रह रही है। टीम के हर सदस्य एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं। मरीजों के साथ कब सुबह से शाम हो जाती है, पता ही नहीं चलता है। सीनियर नर्सिंग ऑफिस सुनील कुशवाहा और सिस्टर इंचार्ज सुनीता देवी कहती हैं कि विपरीत हालात में भी मरीजों की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। टीम में शामिल रेनू पटेल, अरुणा, सोना, दीप्ति मौर्य, आनंद शुुक्ला का कहना है कि नौकरी से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। परिवार से अलग रहकर पूरी तरह से मरीजों की सेवा में लगे हैं। जब वार्ड से मरीज डिस्चार्ज होकर घर जाते हैं तो सबसे ज्यादा खुशी उन्हें होती है। इन नर्सिंग स्टॉफ के साथ वार्डबॉय के रूप में राम देव, नंद लाल, अनिल सिंह, रामवीर, सफाई कर्मी में मुन्ना, अरविंद, निहाल और रमन लगे हैं।