छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में अयोजित 108 पोथी श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में शामिल हुए। पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
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प्रवचन देते रमेशभाई ओझा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में अयोजित 108 पोथी श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में शामिल हुए। पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कथास्थल में व्यासपीठ पर आसीन रमेशभाई ओझा को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री दर्शकदीर्घा में बैठकर कथा सुना।
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महाराज का अभिवादन करते सीएम भूपेश
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मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा से ज्ञान, भक्ति और कर्म की शिक्षा के साथ असीम आनंद की अनुभूति होती है, जो हमारे जीवन को संवारने में अहम् होता है। उन्होंने राजधानी में 15 अप्रैल तक गुजराती समाज की ओर से आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आयोजन के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया।
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कथा का रसपान करते सीएम भूपेश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा से ज्ञान, भक्ति और कर्म की शिक्षा के साथ असीम आनंद की अनुभूति होती है, जो हमारे जीवन को संवारने में अहम् होता है। उन्होंने राजधानी में 15 अप्रैल तक गुजराती समाज की ओर से आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आयोजन के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अनेक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों से समृद्ध है, जो इसके वैभवशाली संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। छत्तीसगढ़ राज्य में ‘आरंग’ एक ऐसी जगह है, जहां भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम दोनों ही पधारे थे। हमारी सरकार ने राज्य के ऐसे सभी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
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कथा का आनंद लेते सीएम भूपेश और महापोर एजाज ढेबर
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इस कड़ी में राम वन गमन पर्यटन परिपथ का भी निर्माण किया जा रहा है। जिसमें भगवान राम के प्रति स्थानीय लोगों की भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजा जा रहा है। इसके तहत राज्य में हर उस जगह को चिन्हित किया गया है, जहां से वनवास के दौरान भगवान राम गुजरे थे।
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इंडोर स्टेडियम में कथा सुनते श्रोतागण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुख्यमंत्री ने इस दौरान राज्य में विकसित हो रहे ‘कृष्ण कुंज’ के बारे में भी अवगत कराया। इसके तहत समस्त नगरीय निकायों को चिन्हाकित किया गया है। जिसमें धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के वृक्षों का रोपण शहरों की हरियाली में वृद्धि और स्वच्छ वातावरण के लिए किया जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, रायपुर महापौर एजाज ढेबर आदि मौजूद रहे।
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भागवत प्रवचन देते महाराज भाई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कथा के तीसरे दिन रमेश भाई ओझा ने कहा कि वनवासी भाई-बहन शहरी छल कपट से बचे हुए हैं। क्योकि वे प्रकृति से जुड़े हुए हैं । माता प्रकृति के सामजंस्य स्थापित करके जीने की कला ही धर्म है। वेदांत की भाषा में उस शक्ति को ब्रह्म यानी निराकार, फिर ईश्वर, माया रूपी और भगवान रूपी माना गया है। रजोगुण के अधिष्ठाता ब्रह्मा, तमोगुण के अधिष्ठाता शिव, सतोगुण के अधिष्ठाता विष्णु हैं। ब्रह्मा सृजन के कारक है , शिव नश्वरता के और विष्णु पालन पोषण के कारक हैं। उन्होंने कहा आप जिस भी सम्प्रदाय से हो, आप ईश्वर को माने या न माने लेकिन धर्म को माने बिना आप संसार में नहीं चल सकते।
उन्होंने कहा कि कुदरत ने ऐसी व्यवस्था की है कि आवश्यकता कभी अधूरी नहीं रहती और इच्छाएं कभी पूर्ण नहीं होती। संसार रूपी समंदर है तो समस्या रूपी लहर उठेगी ही पर हर लहर किनारे जाकर टूटती भी है। संसार साइकल की तरह है पैडल भी मारना पड़ता है और सन्तुलन भी बनाये रखना पड़ता है। यही जीवन है यही यात्रा है।
सत्य तीन तरह का होता है प्रातिभासिक, पारमार्थिक और व्यवहारिक। प्रत्येक कथा हमारे जीवन मे अवसर देती है कि कृष्ण का प्राकट्य हो जाये, इसी तरह हमे भी आज अवसर मिला है। धर्म चर्चा के लिए नही धर्म चर्या है, आचरण है।