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Sawan 2023: ज्वालेश्वर महादेव में नर्मदा उद्गम के जल से किया जा रहा अभिषेक; आज भी बढ़ रहा है 72 फीट का शिवलिंग

Mon, 10 Jul 2023 05:02 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गरियाबंद/गौरेला

सार

सावन के पहले सोमवार पर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शिव मंदिरों में सुबह से भक्तों का तांता लगा हुआ है। भक्त अपनी मुराद लेकर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर रहे हैं। छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश बार्डर पर नर्मदा उद्गम स्थल से जल लाकर ज्वालेश्वर महादेव का अभिषेक किया जा रहा है। वहीं गरियाबंद स्थित 72 फीट के भूतेश्वर नाथ के पूजन के लिए भी श्रद्धालु उमड़े हैं। 
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छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश बॉर्डर पर स्थित नर्मदेश्वर महादेव में श्रद्धालु पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। - फोटो : संवाद
छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश का बॉर्डर सावन के पहले सोमवार को हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा है। दो प्रदेशों के बीच आस्था की डोर नर्मदेश्वर महादेव और ज्वालेश्वर महादेव के बीच बंधी हुई है। नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से कांवड़ में जल लेकर श्रद्धालु 12 किमी का सफर तय कर ज्वालेश्वर महादेव पहुंचकर वहां भगवान शिव को आस्था का प्रसाद चढ़ा रहे हैं। यह सिलसिला ब्रह्म मुहूर्त से चल रहा है। वहीं गरियाबंद का भूतेश्वर नाथ मंदिर में बोम बम के जयकारे गूंज रहे हैं। मान्यता है कि 72 फीट ऊंचा शिवलिंग अब भी बढ़ रहा है। 
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ज्वालेश्वर महादेव का किया जा रहा अभिषेक। - फोटो : संवाद
नर्मदेश्वर महादेव के बाद ज्वालेश्वर का अभिषेक
दरअसल, मध्य प्रदेश के अमरकंटक में नर्मदेश्वर महादेव मंदिर है। यही मां नर्मदा का उद्गम स्थल भी है। सावन के पहले सोमवार के दिन श्रद्धालु कांवड़ लिए निकल पड़े हैं। पहले भक्तों ने जल लेकर भगवान नर्मदेवश्वर का अभिषेक किया। इसके बाद वहां से छत्तीसगढ़ के गौरला स्थित ज्वालेश्वर महादेव मंदिर पहुंच रहे हैं और जलाभिषेक के साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही भी अर्पित कर रहे हैं। ज्वालेश्वर महादेव में जलाभिषेक करने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित ओडिशा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान से भी कांवरिये पहुंचे हैं। 

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गौरेला स्थित ज्वालेश्वर धाम। - फोटो : संवाद
यहीं से हुई है जोहिला नदी की उत्पत्ति
कांवरिये सोमवार को सबसे पहले अमरकंटक पहुंचे। वहां से नर्मदा उद्गम से जल भरकर विशेष पूजा अर्चना के बाद रवाना हुए। कांवरों की आरती हुई और मां नर्मदा से आशीष लेकर ज्वालेश्वर के शिव दरबार में पंहुचे। बाकी समय में ज्वालेश्वर की पहचान भले ही पर्यटन स्थल के रूप में होती हो, पर सावन में इसका अपना अलग ही महत्व है। मान्यता है कि भगवान शिव ने स्वयं इसे स्थापित किया था। पुराणों में इस स्थान को महा रूद्र मेरू कहा गया है। यहीं से अमरकंटक की तीसरी नदी जोहिला नदी की उत्पत्ति होती है।

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गरियाबंद स्थित भूतेश्वर नाथ शिवलिंग। - फोटो : संवाद
मन से मांगी गई मुराद होती है पूरी
गरियाबंद जिले में विराजित विश्व प्रसिद्ध भूतेश्वरनाथ में सावन के पहले पहले दिन सुबह से ही  भक्तों की भीड़ लगी हुई है। दूर-दूर से लोग भगवान भूतेश्वरनाथ के दर्शन-पूजन करने पहुंचे हैं। मान्यता है कि भूतेश्वरनाथ शिवलिंग आज भी बढ़ रहा है। मान्यता है कि भोले बाबा मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी करते हैं। द्वादष ज्योतिर्लिगों की भांति छत्तीसगढ़ में यह एक विशाल प्राकृतिक शिवलिंग है, जो विश्व प्रसिद्ध विशालतम शिवलिंग के नाम से प्रसिध्द है। ऐसी मान्यता है कि यह शिवलिंग हर साल अपने आप में बढ़ता जा रहा है। 
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ज्वालेश्वर महादेव में जल चढ़ाने पहुंचे कांवरिये। - फोटो : संवाद
टीले से आती थी शेर के दहाड़ने और सांड़ के चिल्लाने की आवाज
इस शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व जमीदारी प्रथा के समय पारागांव निवासी शोभासिंह जमींदार की यहां पर खेती बाडी थी। शोभा सिंह शाम को जब घूमने जाता था तो उसे खेत के पास एक विशेष आकृति नुमा टीले से सांड के हुंकारने (चिल्लाने) और शेर के दहाडनें की आवाज सुनाई देती थी। अनेक बार इस आवाज को सुनने के बाद शोभासिंह ने यह बात ग्रामवासियों को बताई। गांवा वालों ने भी उस आवाज को सुना, लेकिन दूर दूर तक कोई जानवर नहीं दिखाई दिया। इसके बाद टीले के प्रति लोगों की श्रद्वा बढ़ने लगी। लोग इस टीले को शिवलिंग के रूप में मानने लगे।
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बच्चे भी शिव भक्ति में रंगे दिखाई दिए। - फोटो : संवाद
72 फीट ऊंचा, 210 फीट है गोलाई
पारागावं के लोग बताते है कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई और गोलाई बढ़ती गई, जो आज भी जारी है। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत जललहरी भी दिखाई देती है, जो धीरे धीरे जमीन के ऊपर आती जा रही है। इस शिवलिंग का पौराणिक महत्व 1959 में गोरखपुर से प्रकाशित धार्मिक पत्रिका कल्याण के वार्षिक अंक में उल्लेखित है। उसमें इसे विश्व का एक अनोखा महान और विशाल शिवलिंग बताया गया है। यह जमीन से लगभग 72 फीट ऊंचा और 210 फीट गोलाकार है। यहां मान्यता है कि सच्चे मन से जो भी मनोकामना की जाती है वह पूरी होती है।
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