बच्चे भी शिव भक्ति में रंगे दिखाई दिए।
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72 फीट ऊंचा, 210 फीट है गोलाई
पारागावं के लोग बताते है कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई और गोलाई बढ़ती गई, जो आज भी जारी है। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत जललहरी भी दिखाई देती है, जो धीरे धीरे जमीन के ऊपर आती जा रही है। इस शिवलिंग का पौराणिक महत्व 1959 में गोरखपुर से प्रकाशित धार्मिक पत्रिका कल्याण के वार्षिक अंक में उल्लेखित है। उसमें इसे विश्व का एक अनोखा महान और विशाल शिवलिंग बताया गया है। यह जमीन से लगभग 72 फीट ऊंचा और 210 फीट गोलाकार है। यहां मान्यता है कि सच्चे मन से जो भी मनोकामना की जाती है वह पूरी होती है।