दुर्ग जिला कोर्ट।
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'अपनों का जीवन समाप्त हो, तो उसके लिए क्या सजा'
दुर्ग जिला कोर्ट ने करीब 20 साल बाद किसी अभियुक्त को फांसी की सजा दी है। विशेष न्यायधीश शैलेश कुमार तिवारी ने फैसला सुनाने से पहले साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की चार पंक्तियां सुनाई। उन्होंने फैसले में इन पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि, अज्ञानता के कारण जो कार्य किया गया हो। उससे किसी अपनों का जीवन समाप्त होता है, तो उसके लिए विरलतम सजा क्या होनी चाहिए। कोर्ट का आदेश सुनते ही संदीप बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा। उसे होश में लाकर जेल दाखिल किया गया।