WWE में अंडरटेकर से लेकर बिग शो तक को धूल चटाने वाले द ग्रेट खली ने फर्श से अर्श का सफर तय किया। जब उन्होंने अपने कड़े संघर्ष की कहानी सुनाई तो वे भावुक हो गए।
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द ग्रेट खली
डब्ल्यूडब्ल्यूई में विश्व चैंपियन रह चुके द ग्रेट खली उर्फ दिलीप सिंह राणा हरियाणा के कैथल में गांव काकौत के निकट एक निजी स्कूल के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए निजी जिंदगी से जुड़े कई राज खोले। खली ने बताया कि प्रैक्टिस के दौरान वे कई बार रिंग में ही सो जाते थे। जब वे पहली बार इंडिया से बाहर यूएस पहुंचे थे तो उनके पास पैसे तक नहीं थे।
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khali
खली ने बताया कि जब मैं 1994 में पंजाब पुलिस में बहाल हुआ तो कैंपस में कुछ जवानों को कसरत करते देखा। उत्सुकतावश दोस्तों से पूछ बैठा कि ऐसे करना से क्या फायदा होता है तो उन्होंने भी मजाक में कह दिया कि रैंक बढ़ती है। प्रमोशन होती है, यह बात मेरे मन में बैठ गई और मैंने भी कसरत करने की ठान ली। धीरे धीरे बॉडी बिल्डिंग में मजा आने लगा।
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Khali
खली ने बताया कि जब बॉडी बिल्डिंग में इतनी रुचि जग गई कि साल 2000 में यूएसए का रुख किया। यहां पहुंचने के बाद रेसलिंग की ट्रेनिंग लेने की ठानी। पर न तो पैसे थे, न घर, न कार। अंग्रेजी भी नहीं आती थी सिवाय यस और नो के। जिस अखाड़े (रिंग) पर प्रैक्टिस करता था, वहीं सो जाता था। एक साल के बाद 2001 में यूएस से जापान गया। 2003 तक वहीं रहा और यहां WWE के लिए जिज्ञासा बढ़ी।
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the great khali
खली ने बताया कि दौलत, शोहरत और इज्जत की भूख उन्हें रिंग में लेकर आई। जब पहली बार जिम गया तो तो वेट लिफ्टिंग मशीन देखकर बेहद डर गया था। पर ट्रेनर ने बताया तो डर निकल गया। खली ने अपनी शादीशुदा जिंदगी पर बातचीत करते हुए बताया कि 16 साल पहले उन्होंने हरमिंदर कौर उर्फ गुड्डी से लव मैरिज की थी। वे पत्नी और बेटी के साथ चार-पांच माह में हिमाचल के सिरमौर जिले में बने अपने गांव जरूर जाते हैं।
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khali
खली ने कहा कि हरियाणा सरकार मदद करे तो वे हरियाणा में अपनी अकादमी खोलेंगे। अभी पंजाब में उनकी अपने खर्च पर अकादमी चल रही है। जहां से करीब 7-8 बच्चों का विश्व डब्ल्यूडब्ल्यूई के लिए चयन हुआ है। इनमें पांच हरियाणा से ही हैं। एक महिला खिलाड़ी भी हरियाणा से है।
कैथल में दिलीप सिंह राणा उर्फ खली ने कहा कि हरियाणा के लोग खेलों से बहुत प्रेम करते हैं। इसी कारण यहां मेडल आते हैं।
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Khali
खली ने कहा कि खेल चाहे कोई भी हो, खिलाड़ी किसी भी जाति से हो, यहां केवल खेल को बढ़ावा दिया जाता है। यह स्थिति पूरे देश में होनी चाहिए। हमारा देश इतना बड़ा है, 100 करोड़ की आबादी है। लेकिन मेडल उस हिसाब से नहीं आते। जबकि कई ऐसे देश हैं, जो काफी छोटे हैं, लेकिन मेडल काफी ले जाते हैं। इसलिए देश में ना केवल शिक्षा बल्कि खेल को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
खली ने कहा कि वह कैथल कई बार आ चुके हैं। यहां आने पर उन्हें लोगों का खूब प्रेम मिलता है। डब्ल्यूडब्ल्यूई व हरियाणा की कुश्ती में ज्यादा अंतर नहीं हैं। जैसे बेसबाल व क्रिकेट में बाल व बल्ले से खेला जाता है। लेकिन नियम अलग-अलग होते हैं। वैसे ही हरियाणवी कुश्ती व डब्ल्यूडब्ल्यूई में ज्यादा अंतर नहीं हैं। केवल नियमों का अंतर है। खली के साथ फोटो खिंचवाने के लिए बच्चों सहित बड़ों की भी होड़ मची रही।