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डायबिटीज के खतरे को टाला जा सकता है, बस बरतें कुछ सावधानियां

Mon, 14 Nov 2016 07:13 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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डायबिटीज
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसके खतरे को आसानी से टाला जा सकता है। बस इसके लिए आपको कुछ सावधानियां बरतनी होंगी।
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डायबिटीज
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार हो जाए पूरी जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। खाने की जो चीज आपको पसंद है, उससे जिंदगी भर के लिए हाथ धोना पड़ता है। कई बार तो डायबिटीज बिना लक्षण आ जाती है। लोगों को पता ही नहीं चलता। जब आपरेशन या दिक्कतें बढ़ती हैं तब डायबिटीज का पता चलता है। ऐसे में 35 साल की उम्र के बाद हर साल ब्लड शुगर का टेस्ट करवाना चाहिए।
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डायबिटीज
डायबिटीज से पहले प्री डायबिटीज का दौर आता है। यदि प्री डायबिटीज के दौरान ही व्यक्ति सतर्क हो जाए तो डायबिटीज से बचा जा सकता है। यदि खाली पेट आप ब्लड शुगर की जांच करवाते हैं तो शुगर लेवल 100 मिलीग्राम/डेसीलीटर होना चाहिए। यदि शुगर लेवल 100-125 मिलीग्राम/डेसीलीटर हो तो फिर प्री डायबिटीज की चपेट में है। हीमोग्लोबिन ए वन सी टेस्ट का लेवल 5.7 परसेंटेज से नीचे होना चाहिए। 5.7 से 6.4 प्रतिशत के बीच है तो प्री डायबिटीज।

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डायबिटीज
जब खून के अंदर ग्लूकोज की मात्रा आउट ऑफ कंट्रोल होती है तो उसे डायबिटीज कहते हैं। भूखे पेट शुगर जांच का स्तर यदि 125 मिलीग्राम/डेसीलीटर से ज्यादा और खाने के बाद शुगर का स्तर 200 मिलीग्राम/डेसीलीटर से ज्यादा आता है तो डायबिटीज है। हीमोग्लोबिन ए वन सी टेस्ट का स्तर यदि 6.4 प्रतिशत से ऊपर आता है तो डायबिटीज कहलाता है।
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डायबिटीज
टाइप वन आमतौर पर बच्चों में पाया जाता है। इसमें इंसुलिन नहीं बनता है। इंसुलिन का काम शुगर को सेल्स के अंदर पहुंचाना होता है। इसका मुख्य कारण क्या है, अब तक पता नहीं चल पाया है। पेनक्रियाज के अंदर बीटा सेल्स होते हैं, जो इंसुलिन बनाने का काम करते हैं। जब कोई वायरस शरीर के अंदर दाखिल होता है तो उसे रोकने के लिए शरीर के सेल्स उससे लड़ते हैं तो उस दौरान सेल्स बीटा सेल्स को भी खत्म कर देते हैं। बीटा सेल्स खत्म होते ही इंसुलिन बनना बंद हो जाती है और पीड़ित को टाइप वन डायबिटीज हो जाता है।
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डायबिटीज
टाइप टू डायबिटीज : इन मरीजों में इंसुलिन तो होती है, लेकिन काम नहीं करती। इसका मुख्य कारण मोटापा होता है। इसमें शुगर आउट आफ कंट्रोल होने लगती है। मोटापे को कंट्रोल करने से टाइप टू डायबिटीज से बचा जा सकता है। मोटापे को जांचने का सही तरीका यह है कि यदि तोंद बढ़ रही है तो समझ लीजिए कि डायबिटीज का रिस्क फैक्टर बढ़ रहा है।
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डायबिटीज
डायबिटीज से सबसे ज्यादा नुकसान किडनी को होता है। शुगर ज्यादा होने से वह किडनी पर प्रभाव डालता है। इसके अलावा शुगर बढ़ने से ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है, जो किडनी के लिए सबसे ज्यादा नुकसान दायक होता है। एक स्टडी के मुताबिक एक चौथाई किडनी फेल के मरीज डायबिटीज से पीड़ित होते हैं। इसलिए डायबिटीज होने पर किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर करवाते रहें।

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डायबिटीज
डायबिटीज के लगभग 80 प्रतिशत रोगियों को जीवन में आंखों की किसी न किसी समस्या का सामना अवश्य करना पड़ता है। इनमें प्रमुख बीमारियां डायबेटिक रेटिनोपैथी, मोतियाबिंद तथा काला मोतिया। मधुमेह के कारण होने वाली इन बीमारियों से बचने के लिए जरूरी है कि मधुमेह के रोगी समय-समय अपनी आंखों की जांच कराते रहें और कोई भी दिक्कत सामने आते ही उसका इलाज करवाना शुरू कर दें।

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डायबिटीज
डायबिटीज से पैरों की समस्या उत्पन्न होती है। उसे डायबिटीज फुट कहते हैं। शुगर की मात्रा अधिक होने से पैर के नसें डेड होने लगती हैं। यह स्थिति तब आती है जब लोग लंबे समय तक डायबिटीज को कंट्रोल नहीं कर पाते। इससे पैरों की संवेदना खत्म होने लगती है। मरीज को न तो ठंड का पता चलता और न ही गर्म का। आमतौर पर ऐसे जख्म पांव के निचले हिस्से के प्रेशर प्वाइंट के नीचे और पैरों की उंगलियों पर होते हैं। लापरवाही पर पांव तक लोगों के काटने पड़ते हैं।

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डायबिटीज से हार्ट की नसों में भी ब्लॉकेज की संभावना बढ़ जाती है। डायबिटीज के उन पेशेंटों को हार्ट अटैक आने की संभावना ज्यादा रहती है, जो शुगर को कंट्रोल नहीं कर पाते। जिन्हें डायबिटीज पांच से छह साल से हो तो वे हार्ट का चेकअप रेगुलर करवाएं। डायबिटीज के दौरान अक्सर मरीज दूध व अन्य पौष्टिक आहार कम लेने लगते हैं। इससे हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं। एक स्टडी के मुताबिक एक आम आदमी के मुकाबले डायबिटीज पेशेंट की हड्डियां कमजोर होती हैं। ऐसे लोगों में फ्रैक्चर की संभावना ज्यादा रहती है।

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गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज के ज्यादा चांस रहते हैं। उस दौरान महिलाएं एक्सरसाइज नहीं करती हैं और शुगर आउट आफ कंट्रोल होने लगती है। इसलिए दंपति जब बच्चे के बारे में सोच रहे हों तो महिलाएं शुगर के स्तर की जांच जरूर करवाएं। गर्भावस्था के दौरान भी बराबर जांच करवाते रहें व डॉक्टर के संपर्क में रहें। डॉक्टरों ने बताया कि इस समय गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज काफी कॉमन हो गई है, जो बच्चे और मां के लिए खतरनाक बन रही है।

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डायबटीज - फोटो : getty images
डायबिटीज से बचने के लिए सबसे पहले शुगर को कंट्रोल करना होगा। डब्ल्यूएचओ की गाइंडलाइंस के मुताबिक पूरे दिन में सिर्फ पांच चम्मच चीनी लेनी चाहिए। नमक को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। तनाव को कंट्रोल करना चाहिए। नमक कंट्रोल करते हैं तो मरीज हाइपरटेंशन के साथ डायबिटीज, हार्ट व ब्रेन स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर से बचता है। एक दिन में सिर्फ पांच ग्राम नमक खाना चाहिए। ज्याद नमकीन चीजों दूर रहें। नमक ज्यादा हो। मसलन पापड़ और स्नैक्स। दोनों में ही नमक की मात्रा काफी अधिक होती है।

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डायबिटीज, हेल्‍थ - फोटो : फाइल फोटो
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुतबिक यदि आपका बीएमआई 23 से कम है तो सामान्य, 23 से ज्यादा ओवरवेट और 25 से ज्यादा बीएमआई वालों को मोटापे से ग्रसित माना जाता है। फैट को कंट्रोल करने के लिए 30 मिनट में ढाई से तीन किलोमीटर को कवर करें। डायबिटीज की जांच बहुत सस्ती है। 20 से 60 रुपये की जांच से हर व्यक्ति डायबिटीज का पता लगा सकता है। डायबिटीज से पीड़ित हैं तो नियम से एक्सरसाइज, दवाई और समय-समय पर जांच जरूरी है। इससे आप क्वालिटी आफ लाइफ जी सकते हैं।

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डायबिटीज, हेल्‍थ - फोटो : फाइल फोटो
हर डायबिटीज पेशेंट को हाइपोग्लाइसीमिया के बारे में जानना चाहिए। खासकर टाइप वन डायबिटीज के पेशेंट को। जब शुगर का स्तर 70 मिलीग्राम/डेसीलीटर से कम हो जाए तो उसे स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। इसमें पेशेंट को घबराहट, आंखों के सामने धुंधलापन, सिरदर्द और बेहोशी जैसी हालत बन जाती है। हाइपोग्लाइसीमिया तब आता है, जब कई बार डायबिटीज की मेडिसिन ज्यादा ले लेते हैं। एक्सरसाइज ज्यादा कर लेते हैं या फिर ज्यादा देर तक  भूखे रहते हैं तो हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। इससे बचने के लिए मरीजों को हर दो घंटे बाद कुछ न कुछ खाना चाहिए।
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डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अब भी लोग इसे बहुत ही हल्के में लेते हैं। डायबिटीज रोकने का सबसे सफल तरीका यही है, जो जुबां को अच्छी चीज लगती है, उसे कंट्रोल में खाएं और रोजाना 45 मिनट की एक्सरसाइज करें। एक बार डायबिटीज होने के बाद पूरी जिंदगी दवाओं और दूसरी बीमारियों का साथ मिल जाएगा।
-डॉ. संजय बडाडा, एडिशनल प्रोफेसर इंडोक्राइनोलाजी, पीजीआई
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