श्राप का डर आज भी महिलाओं के जेहन में है। मंदिर के महंत राज तिलक गिरी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शंकर अपने पुत्र कार्तिकेय का राजतिलक करने का विचार करने लगे, तब माता पार्वती जी अपने छोटे पुत्र गणेश का राजतिलक करवाने के लिए हठ करने लगी। तभी ब्रहमा, विष्णु व शंकर जी सहित सभी देवी-देवता एकत्रित हुए और सभा में यह निर्णय लिया गया कि दोनो भाइयों में जो समस्त पृथ्वी का चक्कर लगा कर पहले पहुंचेगा, वही राजतिलक का अधिकारी होगा।
भगवान कार्तिकेय अपने प्रिय वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए चल पड़े और जब गणेश जी अपने वाहन चूहे पर बैठकर चक्कर लगाने के लिए जाने लगे, तभी माता पार्वती गणेश जी से कहने लगी कि वत्स तुम यहीं पर समस्त देवगणों की परिक्रमा कर डालो, क्योंकि त्रिलोकीनाथ यहीं विराजमान हैं। माता पार्वती के समझाने पर गणेश जी ने तीन चक्कर लगा कर भगवान शंकर को प्रणाम किया और कहा कि मैंने सम्पूर्ण जगत की परिक्रमा कर ली है।