102 साल की उम्र हो गई और रीढ़ की हड्डी भी टेढ़ी है, पर हिम्मत नहीं छोड़ी। ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया कि उसेन बोल्ट की सांसें भी थम गई होंगी एक बार तो।
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एथलीट मान कौर
जिस उम्र में लोग बीमार होकर चारपाई पकड़ लेते हैं, उस उम्र में 102 साल की मान कौर बिल्कुल तंदरुस्त और फिट हैं। एथलेटिक्स में हिस्सा लेते हुए देश-विदेश में मेडल जीतने में जुटी हुई हैं। चंडीगढ़ की रहने वाली मान कौर के हौंसले और जज्बे के आगे अच्छे-अच्छे पस्त हो जाते हैं। आंखों पर चढ़े मोटे चश्मे के बावजूद भी मान कौर अपने लक्ष्य को पाने में कभी चूकती नही।
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एथलीट मान कौर
इन पर अपने को फिट रखने का जनून इस तरह से सवार है कि वह एक चैंपिनयशिप जीतने के बाद अगली चैंपियनशिप की तैयारी में जुट जाती है। मान कौर पर हिस्ट्री चैनल ने एक डॉक्यूमेंटरी तैयार करके उसे विश्व भर में प्रसारित भी किया है। मान कौर रोजाना सुबह पार्क में 400 मीटर की दौड़ लगाती है। अपने को फिट रखने के लिए योगा करती हैं। 30 सालों से बाहर की चीजों को छुआ तक नहीं है। तली हुई कोई भी चीज नहीं खाती।
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एथलीट मान कौर
विदेश की धरती पर अपनी प्रतिभा, लगन और दिलेरी से विदेशियों को धूल चटाने वाली 102 वर्षीय एथलीट मान कौर तब सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अप्रैल 2017 में ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) में आयोजित वर्ल्ड मास्टर गेम्स में 100 मीटर में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। उन्होंने इस रेस में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे दुनिया को संदेश दिया है कि उम्र तो महज एक नम्बर है। हौसलों की उड़ान के आगे उम्र की दीवार भी छोटी पड़ जाती है।
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एथलीट मान कौर
- फोटो : अमर उजाला
वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली मान कौर को 'मिरेकल ऑफ चंडीगढ़' नाम दिया गया है। मान कौर ने एक मिनट 14 सेकेंड में ना सिर्फ दौड़ पूरी की, बल्कि स्वर्ण पदक भी जीता। उनके इस कारनामे को देखकर सभी हैरान है। उन्होंने उसैन बोल्ट के 2009 में बनाए गए 100 मीटर के विश्व रिकार्ड से 64.42 सेकेंड का अधिक समय लिया, वरना उसेन बोल्ट भी पीछे रह जाते। न्यूजीलैंड में जीता गया गोल्ड मेडल मान कौर के करियर का 17वां गोल्ड मेडल था।
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सौ वर्षीय एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
100 मीटर की प्रतिस्पर्धा में मान कौर अपनी कैटेगरी में अकेली ही धावक थीं। मेडल जीतने के बाद मान कौर ने कहा कि मैंने इस रेस का आनंद लिया और मैं बेहद खुश हूं। मैं अभी रुकने वाली नहीं हूं, दौड़ना जारी रखूंगी। मरते दम तक दौड़ती रहूंगी। मान कौर ने 94 वर्ष की उम्र में चंडीगढ़ में हुए नेशनल टूर्नामेंट में मान कौर ने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीते। मान कौर की सफलता की कहानी पर दो डोक्यूमेंट्री भी बन रही हैं।
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सौ वर्षीय एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
अमेरिका में तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड
अमेरिका में भी मान कौर ने 100 और 200 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीते. यहीं नहीं मान कौर ने इस दोनों रेस में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया. 2001 में उन्हें एथलीट ऑफ द ईयर भी चुना गया. 100 मीटर रेस में मान कौर ने 1.17 सेकेंड में पूरा करने का रिकॉर्ड़ तोड़ा। मान कौर ने ये रेस 1.14 सेकेंड पूरी कर रिकॉर्ड़ तोड़ा।
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सौ वर्षीय एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
बेटे को प्रैक्टिस करते देखा तो शुरू की दौड़...
पटियाला में 1916 में जन्मी एथलीट मान कौर बताती है कि बेटा गुरदेव यूनिवर्सिटी में प्रैक्टिस किया करता था, जिसे देख कर 93 की उम्र में दौड़ना शुरू किया और उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बेटे ने भी अपनी मां को दौड़ के लिए प्रेरित किया। मान कौर 1 मार्च को 102 वर्ष की हो गई थी। उम्र के इस दहलीज पर आकर उनके जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।
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सौ वर्षीय एथलीट मान कौर
- फोटो : फाइल फोटो
मान कौर की फिटनेस का राज
मान कौर बताती हैं कि उनकी फिटनेस का राज घर का बनाया खाना है। वे घर में गेहूं को भिगोकर रख देते है और जब गेहूं के दाने अंकुरित हो जाते है तो उसे पीस कर रोटियां बना कर खाते है। रोजाना सुबह केफर का एक गिलास और फ्रूट खाती है। 11.00 बजे गेहूं की रोटी खाते है। दोपहर के 1 बजे बीट का जूस और उसके बाद सोया मिल्क पीते है। मान कौर बताती है कि ग्राउंड में वे 11.00 बजे आकर 45 मिनट तक दौड़ लगाते है।
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एथलीट मान कौर
मान कौर की बेटी 59 वर्षीय अमृत कौर बताती हैं कि वह आज भी सुबह और शाम नियमित रूप से सैर और योगा करती हैं। सुबह छह बजे उठकर पूजा के बाद रोजाना अभ्यास करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। वे जोगिंग भी करती हैं। मान कौर कहती हैं कि मेरा बेटा गुरदेव जो भी करता हैं, मैं उसी का अनुसरण करती हूं। मैं अपने बेटे के साथ रोज अभ्यास करती हूं। खुद को फिट और स्वस्थ रखना मुझे पसंद है। हालांकि मेरी रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो चुकी है, लेकिन मैं दौड़ना नहीं छोड़ूंगी।
102 वर्षीय एथलीट मान कौर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी अपनी गोद में खिला चुकी हैं। मान कौर ने विशेष बातचीत में बताया कि वह कैप्टन के दादा भूपेंदर सिंह के रसोईघर में काम करती थी। उस समय पटियाला शाही राजघराने के अपने ही ठाठ-बाठ थे। महाराजा भूपेंदर सिंह की कई रानियां थीं। महल में हर समय शादी जैसा उत्सव रहता था। महारानी और रानी साहिबा इतनी मिलनसार थीं कि महल में कभी दिन-रात का अहसास ही नहीं होता था।