पेड़ देखने आए श्रद्धालु
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पुजारी के अनुसार, फुटाव तो हो गया था, लेकिन चिंता थी कि पेड़ जिस बात के लिए मशहूर था, क्या वो अब भी होगा। क्या अब भी उसके पत्तों में छेद होगा या नहीं। लेकिन एक करिश्मा हुआ और फुटाव के कुछ सप्ताह बाद ही पत्तों के बीच छेद दिखाई देने लगे। खास बात यह है कि जहां यह ऐतिहासिक पेड़ है, उससे मात्र 10 फीट की दूरी पर एक और पीपल का पेड़ है, लेकिन इस पेड़ के पत्ते बिलकुल साफ आते हैं और उनमें कोई छेद भी नहीं होता। इसके विपरीत पेड़ से करीब 20 मीटर दूर मंदिर परिसर में पुराना कुआं है, जिसके पास मुख्य पेड़ की जड़ें पहुंची हुई थीं और उन जड़ों में से दीवार से फुटाव हो गया, जिसमें से एक टहनी बाहर निकल आई। करिश्माई बात ये है कि उन टहनियों पर जो पत्ते आए, उनमें भी छेद हैं।