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UP में योगी ने बैन किए बूचड़खाने, पर यहां की सप्लाई पर कोई असर नहीं

Wed, 05 Apr 2017 03:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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छतबीड़ जू - फोटो : अमर उजाला
यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही बूचड़खाने और मीट की दुकानें बंद कर दी हों, लेकिन वहां से इस जगह पर चिकन की सप्लाई पर कोई असर नहीं।
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छतबीड़ जू - फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं जीरकपुर स्थित छतबीड़ जू की। यूपी में बूचड़खाने बंद होने के बावजूद छतबीड़ के जानवरों को डाइटिंग नहीं करनी होगी। छतबीड़ प्रबंधन ने जानवरों के लिए डाइट का फुलप्रूफ प्लान तैयार कर लिया है। यूपी में बूचड़ खाने बंद होने और लाइसेंस रिन्यू होने के बाद ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि सप्लाई चेन में अंतर आएगा। अंतर तो आया पर मामूली सा।
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छतबीड़ जू - फोटो : अमर उजाला
पहले यहां दो क्विंटल मीट की सप्लाई नियमित तौर पर की जाती थी लेकिन अब मीट की सप्लाई 180 किलो तक रह गई है। अगर मीट की कमी होती है तो चिकेन से भरपाई की जाती है। छतबीड़ में मीट सप्लाई करने वाले अकील रहमान ने कहा कि यूपी में बूचड़खानों के लाइसेंस का चक्कर है। जिस बूचड़खाने के पास लाइसेंस है उसको कोई परेशानी नहीं है।

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छतबीर जू में लॉयन सफारी
छतबीड़ में शेर, तेंदुएं, जगुआर, हाइना जैसे जानवरों के लिए सप्ताह में छह दिन लगातार मीट की सप्लाई होती है। उन्होंने बताया कि मीट की सप्लाई बाधित तो नहीं हुईं पर उसमें बीस किलो तक का अंतर आया है, जो मामूली है। कभी सप्लाई ज्यादा हो जाती है तो कभी कम। अकील रोजाना यहां पर मीट का व्हीकल लेकर आते हैं। वह रोजाना सहारनपुर से सुबह नौ बजे निकले हैं और करीब डेढ़ बजे यहां पहुंच जाते हैं।
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छतबीड़ जू - फोटो : अमर उजाला
जानवरों का फीडिंग टाइम दोपहर चार बजे है। अकील बताते हैं कि उन्होंने लाइसेंस के लिए अप्लाई किया है और छतबीड़ जू प्रबंधन ने उनको समय दिया है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में स्लाटर हाउस पर पाबंदी है। इसी वजह से छतबीड़ जू में मीट की सप्लाई सहारनपुर से आती है। एक टाइगर की डाइट दस किलोग्राम, एक शेर की डाइट दस किलोग्राम, एक तेंदुए की डाइट 4 किलोग्राम, एक हाइना की डाइट तीन किलोग्राम।

 
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यूपी में बूचड़खानों का छतबीड़ के जानवरों की डाइट पर हम कोई प्रभाव नहीं पड़ने दे रहे हैं। हमारा अनुबंध जिस सप्लायर के साथ उसकी सप्लाई नियमित रूप से आ रही है। यदि कभी सप्लाई में थोड़ी कमी रह भी जाती है तो हमारे पास विकल्प हैं। इतना ही नहीं, यदि कभी सप्लाई न आए तो भी हमारे पास प्लान बी तैयार रहता है। हम चिकेन से मीट की भरपाई पूरी कर लेते हैं।
- मनीष कुमार डायरेक्टर छतबीड़ जू
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