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बाग पुराना हो गया, पेड़ फल नहीं दे रहे तो घबराएं नहीं, बस एक ये काम कर लें

Tue, 13 Jun 2017 11:00 AM IST
जय भगवान सेन/अमर उजाला, घरौंडा(करनाल)
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आम का बगीचा
बाग पुराना हो गया है। पेड़ फल नहीं दे रहे तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपको फिर से नया बाग तैयार करने की भी जरूरत नहीं है, बस ये काम कर लेना।
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आम का बगीचा
इस्राइल की पुनर्जीवीकरण (रिजेनोवेशन) तकनीक से आपके बाग के पुराने पेड़ों को नया कर दिया जाएगा। इसके बाद पुराने पेड़ न केवल फल देने लगेंगे, बल्कि पहले की अपेक्षा अधिक फल देंगे। इस्राइल में इस तकनीक का सफल उपयोग किया जा रहा है। अब इस तकनीक का उपयोग सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में भी किया जा रहा है।
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आम का बगीचा
कोई भी बागबान केंद्र से इस तकनीक को हासिल करके अपने बाग को बिना नया पौधा लगाए नया कर सकता है। करीब 800 रुपये प्रति पेड़ लागत आती है और एक साल में पेड़ दोबारा फल देने लगता है। बागबानों को नए बाग लगाने के लिए बेकार एवं पुराने पेड़ों को काटना नहीं पड़ेगा। इस्राइली तकनीक से बेकार एवं पुराने पेड़ों का पुनर्जीवीकरण किया जा सकता है।

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आम का बगीचा
लंबी अवधि के फलदार पेड़ जैसे आम, अमरूद, बेर एवं आडू 10 से 15 साल बाद फल देना बंद कर देते हैं या उनकी पैदावार कम हो जाती है। आयु के साथ बढ़ती पेड़ों की ऊंचाई के कारण किसानों के लिए लंबे पेड़ों से फल तोड़ना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बागबानी करने वालों को नए बाग लगाने के लिए पुराने पेड़ों को काटना पड़ता है।
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आम का बगीचा
नए बाग लगाने की प्रक्रिया में किसानों को पैदावार के लिए कम से कम चार वर्षों का इंतजार करना पड़ता है। इस कारण अधिकतर किसान फलों की खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं। ऐसे में फलों की खेती से जुड़े भारतीय बागबानों के लिए इस्राइली तकनीक पुनर्जीवीकरण (रिजेनोवेशन) अच्छा विकल्प है।
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आम का बगीचा
इंडो-इस्राइइल के सहयोग से स्थापित सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में इस तकनीक की मदद से 30 से 40 वर्ष पुराने आम के पेड़ों को नया जीवन दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तकनीक से पुराने फलदार पेड़ की कुछ शाखाओं को 6 से 7 फुट की ऊंचाई पर काट दिया जाता है। पेड़ के कटे हिस्सों पर कोपर आक्सिलोराइड और चूने का लेप लगाया जाता है। कुछ दिनों बाद कनोपी मैनेजमेंट के जरिये पेड़ से नई स्वस्थ शाखाएं निकल आती हैं।
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आम का बगीचा
रिजेनोवेशन के एक वर्ष बाद पुराना पेड़ नए पेड़ में बदल जाता है और फल देने लगता है। सेंटर के विशेषज्ञों का कहना है कि रिजेनोवेशन के बाद पेड़ की फल उत्पादन क्षमता बढ़कर पहले की तुलना में डेढ़ गुना अधिक हो जाती है। दूसरी ओर मोटे तने के कारण पेड़ की क्षमता और आयु बढ़ जाती है। हालांकि, पेड़ों पर इस तकनीक का प्रयोग करते हुए किसानों को कुछ खास सावधानी रखनी पड़ती है।

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आम का बगीचा
सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. सत्येंद्र यादव के अनुसार रिजेनोवेशन तकनीक में पेड़ की कटिंग तेजधार ब्लेड से की जाती है। कुल्हाड़ी से काटने पर पेड़ में घाव बनने का खतरा रहता है। यह तकनीक आम, आडू, अमरूद और बेर जैसे मोटे तने वाले पेड़ों में ही प्रयोग की जा सकती है।
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आम का बगीचा
रिजेनोवेशन से एक वर्ष में पेड़ फल देने लगता है और उत्पादन डेढ़ गुणा अधिक हो जाता है। किसान को नया बाग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस्राइल में बेकार एवं पुराने पेड़ों के लिए इसी तकनीक का प्रयोग किया जाता है। उम्मीद है कि इजराइल में सफल रही रिजेनोवेशन तकनीक भारतीय बागबानों के लिए भी वरदान साबित होगी।
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