जज्बे को सलाम, कैंसर से जूझते-जूझते बेटी को ऐसी सीख दी कि उसने यूपीएससी क्लीयर कर लिया और आईएएस अफसर बन गई। उसका पढ़ाई करने का तरीका भी बेहद अनोखा है।
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब के मोगा की रहने वाली रितिका ने यूपीएससी की परीक्षा में पूरे भारत में 88वां रैंक प्राप्त किया है। उन्होंने ये उपलब्धि तब हासिल करके दिखाई, जब उनके पिता लुधियाना के अस्पताल में कैंसर से जूझ रहे हैं। दरअसल, जब रितिका आईएएस की परीक्षा पास करने की जद्दोजहद में जुटी हुई थी तभी उन्हें ये खबर मिली कि उनके पिता को एक बार फिर से कैंसर ने जकड़ लिया है। इन सबके बावजूद रितिका ने अपने मनोबल को कमजोर नहीं पड़ने दिया और वह तैयारी में जुटी रही। इसका फल उन्हें मिला। परीक्षा की तैयारी में मदद करने वाले एमके यादव ने बताया कि रितिका को हमेशा सफलता हासिल करने की ललक रही है। वह 12वीं में सीबीएसई टॉपर भी रह चुकी हैं। रितिका ने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से की है। यहां भी उन्होंने टॉप किया था। कॉलेज के अच्छे प्लेसमेंट ऑफर को ठुकराकर उन्होंने आईएएस बनने का फैसला किया था। दूसरी बार की गई कोशिश में उन्हें यह सफलता मिली है।
यूट्यूब की बजाय गूगल से की पढ़ाई, नहीं ली कोई कोचिंग
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हरियाणा के रोहतक के महम क्षेत्र के गांव भैणी सुरजन की रहने वाली निधि सिवाच ने यूपीएससी की परीक्षा में 83वां रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर परिजन समेत पूरे गांव में खुशी का माहौल है। निधि ने बताया कि उन्हें यकीन ही नहीं था कि इतनी बड़ी सफलता इतनी जल्द मिलेगी। वह अभी तक विश्वास नहीं कर पा रही हैं। निधि के पिता उमेद की सेक्टर चार के नजदीक गुरुग्राम में परचून की दुकान है। मां गृहणी हैं। निधि तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। 24 साल की निधि का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने किसी तरह की कोचिंग नहीं ली। यू-ट्यूब की बजाए गूगल का सहारा लिया। उन्होंने बताया कि उसकी दसवीं व बारहवीं की पढ़ाई सिदेश्वर स्कूल गुरुग्राम से हुई है। छोटूराम यूनिवर्सिटी मुरथल से उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। उसके बाद वह हैदराबाद में टेक महेन्द्रा कंपनी में नौकरी करने चली गई। दो साल के बाद 2017 में उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और गुरुग्राम आकर टेस्ट की तैयारी करने लगी। उन्हें पेपर का पैटर्न समझ में आ गया था। निधि ने बताया कि एजुकेशन सेक्टर सहित महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करेंगी।
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सातवीं कक्षा में जो कहा करके दिखा दिया
पिता के साथ उनका एक दोस्त घर आया तो उसने सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली छोटी सी बच्ची से पूछा कि बेटा बड़ी होकर क्या बनना है। बच्ची ने जवाब दिया, ‘अंकल मैं बड़ी होकर डीसी बनूंगी।’ अपनी इस बात को अमृतपाल कौर ने सिविल सर्विसेज में 44वां रैंक लेकर सच कर दिखाया। शहर में जेल रोड पर रहने वाली अमृतपाल कौर के पिता जोगिंदर सिंह नानोवालिया पावरकॉम विभाग से बतौर एसडीओ सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी माता सेहत विभाग से बतौर हेल्थ वर्कर सेवानिवृत्त हैं। भाई साबी कनाडा में रहता है। अमृतपाल कौर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई लिटिल फ्लॉवर कान्वेंट स्कूल से की। आईएएस की तैयारी के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ से कोचिंग ली। अमृतपाल के पिता जोगिंदर सिंह ने बताया कि उसने पिछले वर्ष आईआरएस में 370वीं रैंक हासिल की थी, जिससे रेलवे विभाग में उसकी नौकरी लग गई, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं थी। इसलिए उसने बिना वेतन छुट्टी लेकर आईएएस की तैयारी शुरू कर दी।
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- फोटो : डेमो
पद संभालने के बाद देश और समाज की करूंगी सेवा: सान्या छाबड़ा
राजपुरा में नगर काउंसिल के पूर्व प्रधान प्रवीण छाबड़ा की बेटी सान्या छाबड़ा 84वीं रैंक हासिल कर शहर की पहली आईएएस बनी है। अपनी बेटी के आईएएस बनने पर खुशी जाहिर करते हुए उनके पिता प्रवीण छाबड़ा और माता दीप्ती छाबड़ा ने बताया कि हम अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकते। सीधे सादे परिवार से ताल्लुक रखने वाली हमारी बेटी ने परिवार का ही नहीं पूरे शहर का नाम रोशन किया है। सान्या के इस मुकाम तक पहुंचने का श्रेय उसकी लगन, मेहनत और अनुशासन को दिया। कहा उसने पढ़ाई के समय आराम और मस्ती को त्याग कर दिन-रात मेहनत करके यह परिणाम हासिल किया है। सान्या ने इस मौके पर कहा कि वह इस पद पर रहकर देश और समाज की सेवा करने में अपना हर संभव योगदान देंगी।
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एक प्रयास में हासिल की मंजिल
सान्या छाबड़ा ने इस सफलता का श्रेय अपने परिवार से हर समय मिलने वाले सहयोग और प्रेरणा को दिया। सान्या ने बताया उन्होंने पहले प्रयास में ही इस उपलब्धि को हासिल किया है। वह चंडीगढ़ में अपनी बुआ के पास रहकर पढ़ाई कर रही थी। आईएएस बनने के लिए पढ़ना उन्होंने 2017 में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद से शुरू कर दिया था। उन्होंने अपनी एमए डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से अंग्रेजी में की थी। लेकिन आईएएस परीक्षा के लिए उन्होंने समाज शास्त्र विषय को चुना। उन्होंने बताया कि वो रोजाना 5-7 घंटे की पढ़ाई करती थी। इसके लिए रेगुलर पढ़ते रहना बहुत जरूरी है। अवेयरनेस और साहित्य से परीक्षा में उन्हें काफी मदद मिलीं। वहीं किताबें पढ़ना और ध्यान लगाना उनके शौक है। सान्या छाबड़ा ने कहा समाज में समानता हासिल करने के लिए हमारी सोच में हर वर्ग के लिए समान नजरिया जरूरी है। वहीं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी पहचान बनाकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।