पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जिस भाषण शैली की दुनिया कायल रही है। जानिए तब क्या हुआ, जब वे अपना अपना पहला भाषण में बीच में ही भूल गए थे। 5 अनकहीं बातें...
विज्ञापन
2 of 7
अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : SELF
एक शख्स कर चुका है उनके जीवन पर शोध
दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी पर डॉ. प्रीतम सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘अटल बिहारी बाजपेयी सृजन और मूल्यांकन’ का विमोचन दिसंबर 2014 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में विद्या भारती के संस्कृति भवन में हुआ था। डॉ. प्रीतम सिंह वे पहले शख्स हैं, जिन्होंने वाजपेयी पर शोध करने की पहल की। देश भर में किसी यूनिवर्सिटी में यह पहला रजिस्ट्रेशन था, जिसे वाजपेयी के जीवन पर शोध के लिए कराया गया था।
विज्ञापन
3 of 7
ATAL BIHARI VAJPAYEE
- फोटो : file photo
इस किताब का विमोचन हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने किया था। कुल 275 पन्नों की इस पुस्तक के कई पृष्ठों पर डॉ. प्रीतम सिंह के शोध कार्य की झलक प्रस्तुत किए गए घटनाक्रमों के रूप में दिखाई देती है। कवि अटल बिहारी बाजपेयी के जीवन एवं दर्शन की झलक इस पुस्तक में उनके जन्म स्थान और वंश परिचय से आगे बढ़ती हुई साहित्य, संवेदना, काव्य के शिल्प पक्ष का अध्ययन कराते हुए समापन की ओर बढ़ती है।
4 of 7
अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
अपना पहला भाषण भूल गए...
अटल बिहारी वाजपेयी अपना पहला भाषण में बीच में भूल गए। यह वाकया गुजरात के वडनगर के उस स्कूल के वार्षिकोत्सव में हुआ, जहां उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी हेडमास्टर थे। बगैर तैयारी किए मंच पर पहुंचे अटल लड़खड़ा गए और भाषण बीच में ही बंद करना पड़ा।
विज्ञापन
5 of 7
अटल बिहारी बाजपेयी
बाजरे का पुआ और कढ़ी के शौकीन अटल
डॉ. प्रीतम सिंह के किताब में उल्लेख है कि अटल को बाजरे का पुआ और गुझिया बहुत पसंद हैं। ग्वालियर का चूड़ा तो उन्हें इतना अच्छा लगता था कि जब भी वे ग्वालियर जाते तो ढेर सा चूड़ा खरीद लाते। खीर, कढ़ी, पनेछा और गलरा उनकी पसंद रहे हैं।
विज्ञापन
6 of 7
अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
पीपल के पेड़ के नीचे बनने वाले मुंगौड़े खाने जरूर जाते
ग्वालियर के एमएलबी रोड पर पीपल के पेड़ के नीचे एक बुढ़िया स्वादिष्ट मुंगौड़े बनाया करती थी, जो अटल की खास पसंद रहे। अटल जब भी ग्वालियर जाते उस पेड़ के नीचे मुंगौड़े बनाने वाली बुढ़िया के मुंगौड़े खाए बिना नहीं लौटते।
चंडीगढ़ से काफी लगाव था
अटल जी का चंडीगढ़ से काफी लगाव था। अकसर पार्टी का प्रदर्शन यहां ठीक रहता था, मगर जब भी कम वोट पड़ते थे तो उनका सीधा सवाल होता, ‘क्यों भई चंडीगढ़ वाले नाराज क्यों हैं?’ जब गांवों में लाल डोरे के बाहर बने मकानों को तोड़ने के नोटिस आ रहे थे तो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पुरषोत्तम महाजन इस समस्या को लेकर वाजपेयी से मिले। उस समय वाजपेयी चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन आए हुए थे। वाजपेयी ने बस इतना ही कहा कि सरकार का काम मकान बनवाना है, तोड़ना नहीं।