आप जानकर चौंक जाएंगे कि हमारे देश में एक ऐसा गांव मौजूद है, जहां मौत के डर से 600 साल पुरानी एक परंपरा का पालन आज भी किया जा रहा है।
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चंडीगढ़ का अनोखा गांव जयंती माजरी
ये गांव चंडीगढ़ से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसा है और इसका नाम है जयंती माजरा। यहां पिछले तीन दिन से चल रहा मशहूर माता जयंती देवी मेला खत्म हो गया है। इस मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु 600 साल पुराने मंदिर में पूजा करने के लिए आते हैं। मेले की कवरेज के दौरान अमर उजाला पत्रकार ने पुजारी देवेंद्र शर्मा से बातचीत की तो कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं।
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चंडीगढ़ का अनोखा गांव जयंती माजरी
पुजारी ने बताया कि इस गांव में कोई भी अपने घर पर फर्स्ट फ्लोर नहीं बनाता। अगर कोई ऐसा करता है तो या तो कोई मौत हो जाती है या कोई और अनहोनी। इसके पीछे का कारण बताते हुए पुजारी ने बताया कि गांव को देवी का श्राप मिला हुआ है। चार साल पहले गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल में फर्स्ट फ्लोर बनाने की कोशिश की गई थी,लेकिन जैसे ही काम शुरू हुआ एक शख्स की करंट लगने से मौत हो गई।
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चंडीगढ़ का अनोखा गांव जयंती माजरी
मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर में पूजा करने वाली ये उनकी 9वीं पीढ़ी है। ये मंदिर मुगलों के समय से बना हुआ और लगभग 600 साल पुराना है। यह गांव हथनौर रियासत के अंतर्गत आता है। इस रियासत की बहू बनने वाली कांगड़ा के राजा की पुत्री ने माता रानी जयंती जी की पिंडी स्थापित करके इसे बनवाया था।
पुजारी ने बताया कि इस मंदिर के नाम पर ही गांव का नाम जयंती माजरी पड़ा। गांव में लगभग 150 घर हैं और इसकी आबादी 900 के लगभग है। यहां सभी मकान लगभग आज के समय के मुताबिक पक्के बने हुए हैं। गांव में कुछ नए मकानों का निर्माण चल रहा है, लेकिन वे भी घर की फर्स्ट फ्लोर नहीं बना रहे हैं।