छह दिन की मासूम बेटी को लावारिस हालत में मनसा देवी मंदिर में छोड़ भागने वाले दंपति की लॉकअप में रहने के बाद ममता जाग गई है। देखिए, तस्वीरें।
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जेल में रहने के बाद जागी 'निर्लज' मां की ममता
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छह दिन की बच्ची को मनसा देवी मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ने वाले चंडीगढ़
रामदरबार में रहने वाले दंपति पूरी तरह डरे हुए हैं। उन्हें अब पछतावा भी
है। बच्ची के पिता राकेश का कहना है कि पांच हजार की नौकरी में खुद का पेट
पालना मुश्किल हो रहा है। पहले से ही उसे दो साल की बेटी भी है।
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माता मनसा देवी मंदिर की सीढ़ियों पर 24 जनवरी को यह बच्ची मिली थी। जनरल
अस्पताल की नर्सों ने बच्ची का नाम अनामिका रख दिया है। 24 के बाद से
अनामिका को मां का दूध भी नसीब नहीं हो सका।
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मां ने दूसरे बच्ची की देखरेख का हवाला देकर भले ही पुलिस से जमानत ले ली लेकिन एक बार भी इस नौनिहाल के बारे में नहीं सोचा। जहां मां की थपकियां मिलनी चाहिए, अब वह अमृत के समान दूध से भी महरूम है।
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पंचकूला सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में दाखिल बच्ची की तबीयत में सुधार के बाद डॉक्टरों ने बच्ची को बाल कल्याण परिषद को सौंप दिया। जिला बाल कल्याण अधिकरी बीरेंद्र सिंह ने बाल कल्याण समिति के चेयरपर्सन के देवेंद्र कुमार के सामने पेश किया।
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चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अनुसार बच्ची को अगर शुरुआती दिनों में मां दूध नहीं है मिलता है तो वह उम्रभर बीमारियों से घिरे रहने की आशंका बनी रहती है। इसकी वजह है कि मां के दूध में हाई एंटीबायोटिक होता है। जो बच्चों को आजीवन इंफेक्शन जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है।
बालरोग विशेषज्ञ के अनुसार जिन बच्चों को पहले छह माह मां का दूध मिलता है। उनमें एलर्जिक बीमारियां कम होने के चांस होते हैं। इसके अलावा ब्रेस्ट फीडिंग से बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास भी जल्दी होता है। क्योंकि मां के दूध में सभी तरह के न्यूट्रीशन मिलते हैं।