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Pics: दो जवान बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा, बड़ी ने दी मुखाग्नि

Tue, 18 Oct 2016 09:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
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दो जवान बेटियों ने मां की अर्थी को दिया कंधा - फोटो : अमर उजाला
दो जवान बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज और दुनिया के लिए पेश की मिसाल। मां की अर्थी को कंधा दिया और बड़ी बेटी ने मुखाग्नि दी। देखिए तस्वीरें।
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दो जवान बेटियों ने मां की अर्थी को दिया कंधा - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-15 की हाउसिंग बोर्ड कालोनी में दो बेटियां न केवल मां की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट तक ले गईं, बल्कि चिता को मुखाग्नि भी दी। इस तरह दोनों बहनों ने मां के लिए बेटे का फर्ज निभाया। 22 साल की मीनू कहती हैं कि मां ने हर पल बेटे से बढ़कर माना, आज दोनों बहनें कैसे अपने फर्ज से पीछे हट जाएं।
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दो जवान बेटियों ने मां की अर्थी को दिया कंधा - फोटो : अमर उजाला
मृतक महिला के पति जवाहर लाल गरीब परिवार से है। दुकान पर काम करके परिवार चला रहे हैं, लेकिन न केवल खुद, बल्कि उसकी पत्नी 49 वर्षीय आशा रानी कई माह से बीमार चल रहे थे। शनिवार की रात अचानक आशा रानी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उनका देहांत हो गया। मां की मौत के बाद से जवाहरलाल की दोनों बेटियों 22 वर्षीय हन्नी व 19 वर्षीय मीनू बेहद गमजदा हैं। रातभर दोनों बहनें मां के शव के पास बैठी रही।

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दो जवान बेटियों ने मां की अर्थी को दिया कंधा - फोटो : अमर उजाला
सुबह रिश्तेदारों के आने के बाद जब अंतिम संस्कार करने की बात आई तो चर्चा हुई कि आशा रानी की दो बेटियां हैं, बेटा नहीं है। ऐसे में मुखाग्नि कौन देगा। बड़ी बेटी हन्नी आगे आई और बोली मां ने कभी बेटों से कम नहीं समझा, आज दोनों बहनें बेटे का फर्ज पूरा करते हुए मां की अर्थी को न केवल कंधा देंगी, बल्कि मुखाग्नि भी वही देंगी। समाज के लोगों व रिश्तेदारों ने बेटियों के फैसले का समर्थन किया।
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दो जवान बेटियों ने मां की अर्थी को दिया कंधा - फोटो : अमर उजाला
जवाहर लाल का परिवार 49 साल से शहर में ही रह रहा है। हन्नी के पिता की तबीयत भी लंबे समय से ठीक नहीं रहती है। इसके चलते आशा देवी पर ही परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी रही, लेकिन आर्थिक कठिनाईयों को देखते हुए हन्नी ने 12वीं के पास आगे बढ़ने की बजाए कंप्यूटर कोर्स किया और ज्वैलर्स शॉप पर नौकरी करने लगी। वहीं, अपनी छोटी बहन को भी पढ़ाने के लिए 12 कक्षा में दाखिला दिलवाया।

 
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