जवानी सिर पर चढ़ते है हर किसी के मन में शादी का लड्डू फूटने लगता है। शादी कब, किससे और कहां होगी, ये सवाल लोगों के ज़हन में छलांग मारने लगते हैं। देश में एक गांव ऐसा भी है, जहां दुल्हन की चाहत रखने के लिए ये काम करना जरुरी है।
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हरियाणा के गांव कालुआना में अनोखा रिवाज
- फोटो : फाइल फोटो
ये गांव है, हरियाणा राजस्थान बॉर्डर पर बसा कालुआना। इस गांव में बरसों से एक प्रथा चली आ रही है। गांव की बेटी को दुल्हन बनाने से पहले दान देना होगा। ये गांव है कालुआना,। यहां दुल्हन ले जाने से पहले दूल्हे को शिक्षा के लिए दान देना पड़ता है। दूल्हे की ओर से दिया गया दान कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति को मिलता है। इसी तरह मिले दानों को समिति करीब 30 से 35 गांवों की 300 बेटियों को पढ़ाने पर खर्च करती है। यह प्रथा पिछले करीब सात साल से चली आ रही है।
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हरियाणा के गांव कालुआना में अनोखा रिवाज
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ऐसे शुरू हुई थी प्रथाः वर्ष 2005 से पहले शिक्षा के मामले में बेटियों की दशा काफी खराब थी। उस समय गांव कालूआना के राजकीय मिडिल स्कूल की एक बेटी भी पास नहीं हुई थी। मूलभूत सुविधाओं से पिछड़ा विद्यालय आखिरी सांस ले रहा था। विद्यालय के एक तरफ गलियां थी, दूसरी तरफ पंचायत घर, एक ओर जोहड़ था। उस समय की पंचायत ने जोहड़ को भरकर स्कूल का विस्तार करने की योजना बनाई।
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दफ्तरों के चक्कर काटेः डेढ़ साल तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद जब न्याय नहीं मिला तो आखिरकार उस समय के सरपंच जगदेव सहारण ने कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति बनाकर जोहड़ को भरने की ठानी। युवाओं के जोश के आगे किसी का बस नहीं चला। जोहड़ भर दिया गया। सरकारी ग्रांट से धड़ाधड़ कमरे खड़े हो गए।
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खर्च पूरा करने को शुरू की गई प्रथाः बसों में तेल, स्टॉफ का पूरा खर्च समिति वहन करती है। यहां तक कि समिति ने अपने खर्च पर गांव कालूआना के शिक्षण संस्थानों में गणित, अंग्रेजी, केमिस्ट्री के प्राध्यापकों साथ-साथ हिंदी, जेबीटी विषयों के अध्यापक भी नियुक्त कर रखे हैं। पूरा खर्च वहन करने के लिए यह अनोखी प्रथा की शुरुआत हुई। गांव की बेटी को अपनी दुल्हन बनाने के लिए गांव में आने वाले दूल्हे से शिक्षा का दान लेना शुरू किया गया। यह प्रथा आज भी प्रचलित है।
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हरियाणा के गांव कालुआना में अनोखा रिवाज
दुल्हन का पिता मांगता है ये दानः यह दान दुल्हन का पिता मांगता है। इससे समिति को लाखों रुपये की आमदन होती है। जिससे उपरोक्त खर्चा चलता है। गांव में होने वाले लड़ाई-झगड़े जो पंचायत स्तर पर निपटते हैं। ऐसे झगड़ों में संबंधित पक्षों को जो जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना राशि को समिति के एकाऊंट में जमा करवाया जाता है। यहीं नहीं फसली सीजन के दौरान समिति सदस्य जमींदारों से उगाही करते हैं। समिति को उपरोक्त दोनों साधनों से आमदन होती है।
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बसों में सफर करने वाली किसी बेटी से पैसा नहीं मांगा जाता। वह अपने स्तर पर समिति को डोनेशन दे सकती है। समिति रजिस्टर्ड है। प्रत्येक वर्ष ऑडिट होती है। ग्रामीणों की आपसी सहमति से शिक्षा का दान दूल्हा देता है। 100 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक दान मिलता है। शिक्षा से ही बेटियों का जीवन उज्ज्वल हो सकता है।
हरियाणा के गांव कालुआना में अनोखा रिवाज
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इसी मकसद से समिति कार्य कर रही है। पंचायत इस कार्य में बढ़चढ़कर अपना योगदान देगी। गांव में जब भी विवाह होता है तो गो शाला, मंदिर को दान देने के साथ-साथ शिक्षा के लिए भी दान निकाला जाता है। वर पक्ष यह दान अपने हाथ से देता है।