न समाज की सुनी, न परंपरा आड़े आने दी। पिता की अंतिम इच्छा पूरी करनी थी, इसलिए 3 बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज, पर एक इच्छा पूरी नहीं कर पाईं।
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बेटियों ने पिता का अंतिम संस्कार किया
चंडीगढ़ में तीन बेटियों ने परंपरा को बदलते हुए पिता की अर्थी को कंधा दिया। यहीं नहीं शमशान घाट में भी अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाई और चिता को मुखग्नि भी दी। इस तरह बेटियों ने बेटों का फर्ज निभाते हुए पिता को अंतिम विदाई दी।
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- फोटो : डेमो
सेक्टर-25 स्थित श्मशानघाट में प्रो. यश गुलाटी का अंतिम संस्कार इलेक्ट्रिक तरीके से किया गया। इस मौके पर शहर भर के कई बुद्धिजीवी और वरिष्ठ साहित्यकार मौजूद रहे। वहीं बेटियों की हिम्मत देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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83 वर्षीय प्रो. यश गुलाटी पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग से बतौर अध्यक्ष रिटायर हुए थे। वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। बेटी अनीता, सुजाता और ज्योत्सना ने उनकी आखिरी इच्छा बखूबी पूरी की।
वहीं, प्रो. गुलाटी की दूसरी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। उनकी इच्छा थी कि उनके शरीर के हर अंग को दान कर दिया जाए, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से अंगदान नहीं किया जा सका।