'पैडमैन' में अक्षय कुमार सैनिटरी पैड पहनकर घूमते दिखे, लेकिन ऐसा करने वाले वो अकेले शख्स नहीं है। सैनिटरी पैड पहनकर घूमने वाला देश का पहला आदमी ये था।
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अरुणाचलम मुरुगनाथम
नाम है, अरुणाचलम मुरुगनाथम। इन्हीं की कहानी से प्रेरित मूवी है अक्षय कुमार की पैडमैन। तमिलनाडु में 1962 में जन्मे मुरुगनाथम ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को पैड के इस्तेमाल के प्रति जागरूक किया था। उनकी इसी संघर्षपूर्ण कहानी को फिल्मी पर्दे पर अभिनेता अक्षय कुमार 26 जनवरी को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं। ट्विंकल खन्ना फिल्म को प्रोड्यूस और निर्देशित कर रही है।
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अरुणाचलम मुरुगनाथम
अरुणाचलम मुरुगनाथम ने कम लागत वाले सेनेटरी पैड बनाने की मशीन का आविष्कार किया था। मुरुगनथम ने एक ऐसी मशीन का निर्माण किया था, जो सेनेटरी नैपकिन्स सस्ते दाम में बनाती थी। उनको इस आविष्कार के लिए पद्मश्री से भी नवाजा गया था। ट्विंकल खन्ना की दूसरी किताब ‘द लेजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद’ का आखिरी अध्याय इसी फिल्म से जुड़ा हुआ है।
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अरुणाचलम मुरुगनाथम
अरुणाचलम कोयंबटूर के बहुत गरीब परिवार से थे। जब वे बहुत छोटे थे तो पिता का देहांत हो गया। मां ए. वनिता ने मेहनत मजदूरी करके पाला। 14 साल की उम्र में अरुणाचलम को स्कूल से निकाल दिया था तो गुजर बसर करने के लिए उन्होंने कई जगह नौकरी की। 1998 में उसकी शादी शांति से हुई।
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अरुणाचलम मुरुगनाथम
शांति पीरियड के दौरान गंदा कपड़ा प्रयोग करती थी, हालांकि उसे सैनिटरी पैड के बारे में पता था, लेकिन खर्चा न हो, इसलिए वह भी और महिलाओं की तरह कपड़ा इस्तेमाल करती थी। एक दिन अरुणाचलम को यह पता चला तो हैरान रह गया। बीवी को परेशानी न हो, यह सोचकर उन्होंने पैड बनाने की मशीन तैयार करने की ठान ली।
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अरुणाचलम मुरुगनाथम
अरुणाचलम को मशीन बनाने में दो साल लगे। कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और कम लागत में सैनिटरी पैड बनाने की मशीन तैयार कर दी। अरुणाचलम ने मशीन का सुझाव 2006 में आईआईटी मद्रास के सामने रखा, जो सभी को काफी पसंद आया। फिर उनका नाम नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ग्रासरूट टेक्नोलॉजीकल इनोवेशन अवार्ड के लिए भेजा गया।
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अरुणाचलम मुरुगनाथम
अरुणाचलम यह अवार्ड जीतने में कामयाब रहे और फिर उन्होंने जयाश्री इंडस्ट्रीज की स्थापित की। इस इंडस्ट्री में 1300 से ज्यादा मशीनें बनाई, जो इस समय 27 राज्यों के अलावा सात देशों में स्थापित की गई हैं। कई कंपनियों ने अरुणाचलम के इस आविष्कार को खरीदने का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। आज अरुणाचलम इस मुद्दे पर लेक्चर भी देते हैं।
महिलाओं की समस्या को समझते हुए बनाई गई इस मशीन के लिए अरुणाचलम को भारत सरकार ने पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया। अरुणाचलम को टाइम मैगजीन द्वारा विश्व के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल किया गया था। उन्हें ज्वैल्स ऑफ कोयंबटूर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। उनकी कहानी पर कई डोक्यूमेंट्री भी बनाई गई हैं।