गर्मी और मानसून के चलते स्वाइन फ्लू के वायरस की एंट्री हो चुकी है। जानिए ये कैसे फैलता है, इसके लक्षण और इसके वायरल से बचने के तरीके।
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swine flu virous
चंडीगढ़ में स्वाइन फ्लू के साथ शहर में वायरल ने भी दस्तक दे दी है। पिछले एक हफ्ते से कई मरीज डिस्पेंसरी व अस्पताल में पहुंच रहे हैं। शनिवार को सेक्टर- 16 अस्पताल में वायरल के 200 से ज्यादा वायरल मरीज देखे गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। सेक्टर- 16 अस्पताल व सेक्टर नौ स्थित मलेरिया विंग के दफ्तर में कंट्रोल रूम बनाया गया है।
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पीजीआई, मेडिकल कालेज और सेक्टर- 16 अस्पताल में नोडल आफिसर नियुक्त किए गए हैं। साथ सभी घरों के सर्वे करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए 19 फील्ड यूनिट हर जाकर बुखार पीड़ित मरीजों की जांच करेंगी। इसके साथ ही सेक्टर- 16 अस्पताल में एक स्क्रीनिंग ओपीडी खोली गई है। इसमें 24 घंटे डॉक्टर मौजूद रहेंगे। इसके अलावा स्वाइन फ्लू की दवाइयों का अतिरिक्त स्टाक मंगाया गया है।
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स्वाइन फ्लू का सबसे खतरा उन लोगों में सबसे ज्यादा है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है। इनमें मुख्य रूप से डायबिटीज, कैंसर और हार्ट के मरीज शामिल हैं। इसके अलावा सीनियर सिटीजन को भी स्वाइन फ्लू का खतरा है। चंडीगढ़ में अब तक स्वाइन फ्लू के छह कंफर्म केस आ चुके हैं। इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। उसके फेफड़े में पानी भर चुका था। जबरदस्त निमोनिया था।
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डॉक्टर ने बताया कि चार दिन तक उस शख्स से वेंटीलेटर पर रखा गया। डाक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। स्वास्थ्य विभाग अंदाजा लगा रहा था कि जो भी स्वाइन फ्लू के मरीज हैं, वह प्रभावित इलाकों में गए थे और उसकी चपेट में आ गए हैं। लेकिन जो दो पेशेंट आए हैं, उनकी कोई भी ट्रैवलिंग हिस्ट्री नहीं है। इससे एक बात साफ हो गई है कि शहर में स्वाइन फ्लू का वायरस मौजूद है।
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वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं। मौसम में उमस बढ़ने से वायरल के केस आ रहे हैं। हालांकि पिछले साल अगस्त महीने में वायरल के केस सामने आए थे। इस बार बारिश कम हुई है। इससे उमस की मात्रा काफी अधिक है। इस वजह से वायरल का प्रकोप बढ़ा है। वायरल सीजन की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में एहतियात बरतने की जरूरत है। लोगों को हाइजिन का ध्यान रखना होगा।
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ऐसे बचें वायरल से
ताजा खाना खाएं। खाने से पहले हाथ को अच्छी तरह से साफ करें। भीड़-भाड़ वाली जगह जाने से बचें। बुखार से पीड़ित मरीज से दूर रहें। जब तक बुखार हो, घर पर ही आराम करें। 24-48 घंटे तक बुखार हो तो डाक्टर को दिखाएं। गले में खराश हो तब भी डाक्टर के पास जाएं। खांसते व छींकते वक्त रुमाल का इस्तेमाल करें। जिन इलाकों में स्वाइन फ्लू है, वहां पर ट्रैवल न करें। बाहर से आने पर हाथ मुंह जरूर धोएं।
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पीजीआई के मेडिसिन डिपार्टमेंट के डाक्टरों का कहना है कि मरीजों को स्वाइन फ्लू से बचाव का टीका लगवा लेना चाहिए। इससे काफी हद तक बचाव होता है। मार्केट में स्वाइन फ्लू के टीके उपलब्ध हैं। डाक्टर के परामर्श के बाद टीके लगवा सकते हैं। स्वाइन फ्लू के मरीज का इलाज करने वाले डाक्टर व नर्स को टीके लगाने की हिदायत दी जाती है। डाक्टरों का कहना है कि टीके के लिए यही वक्त सबसे बेहतर है।
स्वाइन फ्लू और डेंगू के मरीज आने के साथ वायरल का भी प्रकोप बढ़ रहा है। थोड़ी सी सावधानी रखने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इलाज की पूरी तैयारियां हैं।
- डा. गोपाल भारद्वाज, सीनियर फिजिशियन जीएमएसएच 16 चंडीगढ़