दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी आसान हो जाती है। पर्वतारोही ममता सौदा ने भी ऐसी ही एक मिसाल पेश की है। आज वे पंचकूला में एसीपी के पद पर तैनात हैं।
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बेटी हो तो ऐसीः स्कॉलरशिप मिली तो लांघ दिए 4 पहाड़
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ममता सौदा ने कहा कि उनके पिता सात वर्षों तक बेड पर रहे। उनकी पढ़ाई चल रही थी। पढ़ाई पूरी करने की भी जिम्मेदारी थी और पिता के देखरेख की भी। कैथल में पढ़ाई के दौरान उन्हें अमर उजाला से स्कॉलरशिप मिलती रही और खेल में भी प्रोत्साहन मिला, जिससे हौसला बढ़ता गया। इसलिए ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ द्वारा की गई छात्रवृत्ति योजना की पहल वाकई सराहनीय है।
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कैथल के आर्य समाज स्कूल से पढ़ाई करने वालीं एसीपी ममता सौदा ने कहा कि उनके पिता अफसर थे और 1997 से 2004 तक बेड रेस्ट पर रहे। उस समय तक उन्हें पैसों की अहमियत पता नहीं थी। उनके निधन के बाद पैसों की अहमियत और पारिवारिक जिम्मेदारी की समझ आई।
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एसीपी ममता सौदा कहती हैं कि परिस्थितियां विपरीत थीं, लेकिन प्रोत्साहन राशि ने उनका हौसला बढ़ाया और वह आगे बढ़ती गईं। अब तक वह सात में से चार पर्वतारोहण अभियान को पूरा कर चुकी हैं और सातों अभियान को पूरा करने की इच्छा रखती हैं। उम्मीद है कि उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा।
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पर्वतारोही ममता सौदा ने कहा कि जीवन में किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए संतुलन बेहद जरूरी है। अगर कोई पढ़ाई में अव्वल है, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई जारी रखने में दिक्कत हो रही है तो प्रोत्साहन राशि उसे नई दिशा देती है और वह सफलता की ओर और भी तेजी से बढ़ता है।