गांव मंगवाल के गुरिंदर सिंह पिछले छह दिन से गांव भगवानपुरा में ही डटे थे। उन्होंने प्रशासन से ऑपरेशन में सहयोग करने की पेशकश भी की थी, लेकिन प्रशासन ने इजाजत नहीं दी।
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- फोटो : अमर उजाला
सोमवार रात जब प्रशासन और सरकार के सभी दांव उलटे पड़ गए तो मंगलवार सुबह करीब साढे़ तीन बजे एकाएक प्रशासन को गुरिंदर सिंह की याद आ गई। उस समय भी गुरिंदर वहीं मौजूद थे। बताया जाता है कि जिले के आला अधिकारियों ने उनकी थ्योरी को समझा और उसकी मांग पर घटनास्थल पर ही कुंडी लगी लोहे की रॉड बनवाई।
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- फोटो : अमर उजाला
गुरिंदर सिंह ने इस लोहे की रॉड को पुराने बोर में डाला और सीसीटीवी कैमरे की मदद से फतेहवीर के शरीर के साथ चिपकी बोरी (जो बोर के ऊपर रखी थी और 6 जून शाम चार बजे फतेहवीर इस बोरी समेत बोर में गिर गया था) को हटाने में सफल हो गया।
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इससे फतेहवीर के शरीर को स्पेस मिल गया और चंद पलों में ही पहले से उसके हाथों में बंधे रस्सियों से उसे ऊपर खींच लिया गया। इस कसरत में गुरिंदर को करीब पंद्रह मिनट का समय लगा। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और फतेहवीर इस दुनिया को अलविदा कह चुका था।
गुरिंदर सिंह ने दावा किया कि लोहे की रॉड से बच्चे को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। यदि समय रहते उसे मौका दिया होता तो शायद फतेहवीर आज सभी के बीच होता। लेकिन लोग इस बात पर भी आपत्ति जता रहे हैं कि प्रशासन ने कुंडी लगी लोहे की रॉड से नन्हें फतेहवीर पर प्रहार करवाकर इंसानियत को शर्मसार किया है।