सरकार ओलंपिक मेडल जीतने वालों पर पैसों और ईनाम की बारिश कर रही है, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसी भी है जो चाय बेचकर अपना और परिवार का गुजारा कर रही है।
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7 गोल्ड मेडल जीत चुकी वेट लिफ्टर चाय बेचने को मजबूर
नेशनल और स्टेट लेवल पर 7 गोल्ड मेडल जीत चुकी है। अब देश के लिए मेडल जीतना चाहती है, लेकिन हाथ में चाय की केतली है और 7 लोगों का परिवार की जिम्मेदारी। ये कहानी है गोल्ड मेडलिस्ट वेट लिफ्टर संतोष की।
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7 गोल्ड मेडल जीत चुकी वेट लिफ्टर चाय बेचने को मजबूर
सोनीपत की रहने वाली वेट लिफ्टर संतोष के घुटने में प्रैक्टिस के दौरान चोट लग गई थी, लेकिन उनके पास इलाज के लिए पैसे तक नहीं है। इसी मजबूरी में उसे खेलना छोड़ना पड़ा।
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7 गोल्ड मेडल जीत चुकी वेट लिफ्टर चाय बेचने को मजबूर
संतोष बताती हैं कि राजेन्द्र कुमार चाय की दुकान चलाते हैं और किराए के मकान में रहते हैं। गरीबी के कारण 7 लोगों के परिवार का गुजारा बड़ी मश्किल से चलता है। ऐसे में संतोष भी अपने पिता के मदद के लिए चाय की दुकान पर काम करती है।
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7 गोल्ड मेडल जीत चुकी वेट लिफ्टर चाय बेचने को मजबूर
संतोष बताती हैं कि उनके पास पढ़ाई तक के लिए पैसे नहीं हैं। परिवार का गुजारा अच्छे से हो सके, इसके लिए वे दंगल भी लड़ती हैं। अब उन्होंने हरियाणा सरकार से मदद की गुहार लगा रही है ताकि अपना इलाज कराकर आराम से चल फिर सके।
7 गोल्ड मेडल जीत चुकी वेट लिफ्टर चाय बेचने को मजबूर
संतोष के पिता राजेंद्र कुमार कहते हैं कि उनका सपना है कि बेटी खेलों में नाम कमाएं। देश का नाम रोशन करे, लेकिन गरीबी के कारण उसे खेल छोड़ना पड़ा। वहीं मां का कहना है कि सरकार खिलाड़ियों के लिए इतना सब कुछ कर रही है, उनकी बेटी का इलाज भी करवा दे।