महाशिवारात्रि पर भगवान शिव को मनाने का सुनहरा मौका है। इस वर्ष बेहद खास दो योग बन रहे हैं, जानिए कब कब करें शिव पूजन।
विज्ञापन
2 of 8
- फोटो : File Photo
महाशिवरात्रि का त्योहार शुक्रवार को है। मंदिरों को जगमग रोशनी से सजा दिया गया है। मंदिरों में भक्तों को परेशानी न हो इसके लिए कमेटियों ने हर प्रकार की तैयारी कर ली है। मंदिर कमेटियों की ओर से दूध का लंगर लगाया जाएगा। भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा की जाएगी। भजन कीर्तन का आयोजन होगा।
विज्ञापन
3 of 8
- फोटो : फाइल फोटो
30 वर्ष बाद आया संयोग
शिव पुराण के अनुसार जब ग्रहों के राजा सूर्य अपने 12 किरणों से इस संसार को प्रकाशित करते हैं, तब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन द्वादश ज्योतिर्लिंग अवतार के अवसर एवं भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के दिन को महाशिवरात्रि का पर्व कहते हैं।
4 of 8
- फोटो : File Photo
चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि महाशिवरात्रि को महाअधियोग महाभिषेक योग बन रहा है। ऐसा संयोग 30 वर्ष के बाद आया है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के मंदिर में लघु रुद्र, महारुद्र अति रुद्राभिषेक और शिवार्चन करने से मनुष्य की हर प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विज्ञापन
5 of 8
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर चढ़ता दूध
- फोटो : amar ujala
दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व इस बार स्वार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास होगा। चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे प्रारंभ होगी। जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि व्यापिनी होने पर विशेष माना जाता है। ऐसे में चूंकि 25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिव रात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत रहेगा।
विज्ञापन
6 of 8
महाशिवरात्रि
- फोटो : amar ujala
24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी, लेकिन भद्रा पाताल लोक में होने के कारण महाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी, बल्कि यह अत्यंत शुभ रहेगा। महाशिवरात्रि का व्रत कर रात्रि में ओम नम: शिवाय का जाप करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होगी। जो व्यक्ति वर्ष भर कोई व्रत उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है।
विज्ञापन
7 of 8
- फोटो : फाइल फोटो
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। प्रथम पूजा शाम को छह बजकर 15 मिनट से रात नौ बजकर 25 मिनट तक। दूसरी पूजा रात को नौ बजकर 25 मिनट से रात 12 बजकर 35 मिनट तक। तीसरी पूजा रात 12 बजकर 35 मिनट से रात तीन बजकर 45 मिनट तक। चौथी पूजा रात तीन बजकर 45 मिनट से सुबह छह बजकर 54 मिनट तक।
शिवरात्रि पर मंदिरों में पूजा-अर्चना
- फोटो : Amar Ujala
मिश्र ने बताया कि ये चारों पूजन का विशेष महत्व है, लेकिन दूसरे पूजन में रात नौ बजकर 25 मिनट से रात 12 बजकर 35 मिनट का समय बहुत ही शुभ है। चंडीगढ़ में सेक्टर-38 के श्री सनातन धर्म मंदिर के प्रमुख पुजारी उमाशंकर पांडेय का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन शांति पाठ करने के बाद संकल्प, गणेश, नंदी, वीरभद्र, कार्तिक, कुबेर, कीर्तिमुख, सर्प का पूजन करना चाहिए। इस पूजन को करने के बाद शिव पार्वती का पूजन प्रारंभ करनी चाहिए।