अगर आप अपने घर के बाहर पड़े कचरे से परेशान रहते हैं तो शर्मा जी का तरीका अपनाएं, घर तो घर पूरी गली चमक जाएगी। देखिए
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मेरा गार्डन, मेरी पहचान
- फोटो : अमर उजाला
गार्डन सजाने का शौक मेरे घर में बचपन से रहा है। जब हम चंडीगढ़ सेक्टर - 51 में चार साल पहले शिफ्ट हुए तो घर के बाहर गदंगी थी। तभी हमने यहां पर परशिमन लेकर गार्डन बनाने का फैसला किया। अमर उजाला से बातचीत के दौरान अरुण शर्मा ने यह बात कही।
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मेरा गार्डन, मेरी पहचान
शर्मा ने बताया कि घर के बाहर और अंदर की जगह पर गदंगी बनी हुई थी। तब मैने यहां पर गार्डन बनाने का फैसला लेकर प्रशासन से अनुमति मांगी। इसके बाद यहां पर गार्डन डेवलप करने की अनुमति मिल गई।
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मेरा गार्डन, मेरी पहचान
- फोटो : अमर उजाला
इनके गार्डन में अनार, संतरा के पौधे लगाए हैं। वहीं गुड़हल, गुलदाउदी, गेंदा, गुलाब के फूल भी गार्डन की सजावट में चार चांद लगा रहे हैं। वहीं बोगनविलिया के फूलों से भी गार्डन की सजावट की गई है। वहीं उन्होंने अपने गार्डन में चिकू, नींबू के पौधे भी लगाए गए हैं।
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मेरा गार्डन, मेरी पहचान
- फोटो : अमर उजाला
अरुण शर्मा ने बताया कि गार्डन में सुबह उठकर उनकी पत्नी नीलम शर्मा और बेटे तरून और रजत गार्डन में रखे सभी गमलों में पानी देते हैं। उन्होंने अपने घर के सामने और पीछे स्थित मकानों की साज सज्जा के लिए यह गार्डन बनाया है।
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मेरा गार्डन, मेरी पहचान
- फोटो : अमर उजाला
शर्मा ने कहा कि इस गार्डन में सुबह के समय हमारा परिवार और पड़ोसी घूमते हैं। बेहतरीन वातावारण में घूमने से काफी राहत मिलती है।उन्होंने बताया कि जहां पर उनका घर बना है वह पर काफी जगह और छूटी है लेकिन वहां पर इस तरह का गार्डन नहीं डेवलप है।
उनका मानना है कि लोगों को परमिशन लेकर खाली पड़ी जगह पर गार्डन सजाना चाहिए। इससे आस पास का माहौल स्वच्छ रहेगा। चंडीगढ़ की पहचान स्वच्छता और हरियाली से है। इसलिए सभी को गार्डन की सजावट के लिए आगे आना चाहिए।