आजादी के 70 साल बाद भी समाज में भेदभाव की खबरें आती रहती हैं। देखिए एक ऐसा ही मामला जहां दलितों को हवन में आहुती नहीं डालने दी गई।
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मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री के पैतृक गांव में दलितों के खिलाफ शर्मनाक फरमान सुनाया गया है, जिस पर विवाद के बाद गांव में तनाव का माहौल है। घटना हरियाणा के जींद की है। केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के गांव डूमरखा खुर्द में एक मंदिर में शुरू हुए हवन यज्ञ में दलितों को भाग नहीं लेने देने को कहा गया है।
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एक दिन पहले तक समझौते की बात करने वाली पुलिस ने बुधवार को फरमान सुनाने वाले पुजारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वहीं, दलित समाज के लोग फरमान सुनाने वाले की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
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गांव डूमरखा खुर्द के एक मंदिर में मंगलवार को हवन शुरू किया गया है। हवन नौ जुलाई तक चलेगा। बताते हैं कि यज्ञ से पहले गांव के लोगों की बैठक हुई, जिसमें एक पंडित ने हवन से दलित समाज को दूर रहने का फरमान जारी कर दिया। दलित समाज के लोगों ने पंडित के फरमान का विरोध कर दिया।
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जब उन पर पंडित के आदेश का पालन करने के लिए दबाव डाला गया तो उन्होंने सदर थाने में लिखित शिकायत कर दी। दलित समाज के लोगों ने पुलिस से गुहार लगाई कि जात-पांत का जहर फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लिखित शिकायत मिलने के बाद सदर थाना प्रभारी रमेश कुमार मंदिर पहुंचे और गांव के लोगों से बात की।
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गांव में दलितों के खिलाफ शर्मनाक फरमान
दलित समाज के लोगों ने कहा कि उन्होंने मंदिर और हवन के लिए बांच (चंदा) दिया है। इसके अलावा दूसरे कार्यों में भी सहयोग दिया है। हवन गांव में भाईचारा बनाए रखने और सुख समृद्धि के लिए कराया जा रहा है। मंदिर और हवन से दूर रखना उनके अधिकारों का हनन है।
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गांव में दलितों के खिलाफ शर्मनाक फरमान
मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। गांव में जांच के बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपी जल्द काबू किया जाएगा।
-रमेश कुमार, सदर थाना प्रभारी, नरवाना।
गांव डूमरखां खुर्द के मंदिर के महंत खेड़ेश्री अर्जुन गिरी महाराज ने कहा कि मंदिर में पूजा करने के लिए किसी भी जाति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हवन में शामिल होने से किसी जाति विशेष पर रोक लगाने जैसी भी कोई बात नहीं है। हवन में विद्वान पंडितों के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं है। हवन से पूर्व गांव में जो कलश यात्रा निकाली गई थी, उसमें सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया था। गलतफहमी में मामला हो गया है। पंचायत में मामले का पटाक्षेप कर दिया गया है।