'रोटी की जंग' छेड़ने वाले जवान तेज बहादुर को लेकर बीएसएफ ने कई ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्हें जानकर आप कहेंगे कि यकीं नहीं होता, ऐसा भी हो सकता है।
विज्ञापन
2 of 7
बीएसएफ का जवान तेज बहादुर यादव
बीएसएफ ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश किया। इसमें कहा गया कि वह कई बार अनुशासनहीनता कर चुका है। वीडियो में यादव द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर विस्तृत स्टाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया गया है। तेज बहादुर को एक बार बिना इजाजत 13 दिन की छुट्टी जाने पर दंड मिला। 28 अगस्त, 2007 में नशा करने कि लिए दंडित किया गया। 31 मार्च, 2010 को वरिष्ठ अफसरों को धमकी देने के आरोप में 89 दिनों के लिए कोर्ट मार्शल हुआ।
विज्ञापन
3 of 7
बीएसएफ का जवान तेज बहादुर यादव
बीएसएफ अधिकारियों ने हाईकोर्ट से कहा है कि जवानों का स्वास्थ्य व सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। जवानों को पौष्टिक आहार मिले यह सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी प्रणाली लागू की गई है। बीएसएफ ने अपने जवाब में खाने को लेकर लगाए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि जवानों को दिया जाने वाला खाना बीएसएफ मेस में कमांडर के नेतृत्व में बनाया जाता है।
4 of 7
तेजबहादुर के वायरल वीडियो पर बोली पत्नीं
बीएसएफ ने बताया कि खाने की गुणवत्ता व अन्य विषयों पर चर्चा के लिए कंपनी कमांडर के नेतृत्व में हर माह की 25 तारीख को बैठक होती है। खाने की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण करते हैं। इतना ही नहीं सुपरवाइजर नियमित रूप से खाने की गुणवत्ता की जांच करते हैं। तेज बहादुर समेत उसकी बटालियन के किसी अन्य ने खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर शिकायत निवारण सेल में कभी नहीं की।
विज्ञापन
5 of 7
तेजबहादुर के वायरल वीडियो पर बोली पत्नीं
गौरतलब है कि तेज बहादुर द्वारा खराब भोजन की वीडियो सोशल मीडिया में डालने के बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह जनहित याचिका पूर्व सैनिक पूरनचंद आर्य ने दायर की है। याची ने 9 जनवरी को सोशल मीडिया पर वायरल हुई बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव के वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया है कि बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के जवानों को खराब गुणवत्ता का खाना दिया जा रहा है। अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है।
विज्ञापन
6 of 7
तेजबहादुर के बाद मां ने भी खोला मोर्चा
बीएसएफ ने हलफनामे में बताया कि तेज बहादुर ने वीआरएस के लिए 14 अक्टूबर, 2016 में अर्जी लगाई थी। विभाग ने 25 दिनों के भीतर ही उसकी अर्जी स्वीकार की। बीएसएफ ने बताया कि 31 जनवरी, 2017 को वीआरएस दिया जाना था, लेकिन 15 जनवरी को तेज बहादुर ने फिर से पत्र लिखकर वीआरएस रद्द करने की मांग की। 9 जनवरी को वीडियो वायरल होने के बाद जांच कमेटी बनाई गई और पूछताछ के लिए 30 जनवरी को वीआरएस रद्द किया गया।
गौरतलब है कि बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने नौ जनवरी को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में उसने जवानों को कथित तौर पर दिये जाने वाले खाने को दिखाया था। यादव ने दाल में केवल हल्दी और नमक होने का दावा किया था। उसने साथ ही कहा था कि उन्हें जली हुई रोटी दी जाती है। उसने कहा था कि पाकिस्तान से सटे नियंत्रण रेखा समेत कई स्थानों पर इस प्रकार का खाना दिया जाता है और कई बार जवानों को भूखे पेट सोना पड़ता है।