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WWE के रिंग में अब उतरेगा ये पहलवान, तैयार कर रहे खुद महाबली 'द ग्रेट खली'

Sat, 25 Feb 2017 09:10 AM IST
अमित रुखाया/अमर उजाला, फतेहाबाद(हरियाणा)
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पहलवान बलजीत सिंह
द ग्रेट खली के बाद देश का एक और पहलवान WWE के रिंग में नजर आएगा। इन्हें खुद खली तैयार कर रहे हैं और दावा अंडरटेकर से मुकाबला करने का है।
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पहलवान बलजीत सिंह
ये पहलवान हरियाणा के फतेहाबाद के गांव हिजरावांकलां का रहने वाला है। नाम है पहलवान बलजीत सिंह, जिन्हें द ग्रेट खली ने अपना शार्गिद बना लिया है। इन्हें खली ही ट्रेनिंग दे रहे हैं और पहलवानी का हर वो गुर सिखा रहे हैं जो अंडरटेकर से मुकाबला करने के लिए जरूरी होगा। खली ने इन्हें नया नाम भी दिया है, माईटी किंग। वह इसी नाम से अब रेसलिंग के रिंग में अपना दांव दिखाएगा।
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पहलवान बलजीत सिंह
बता दें कि हाल ही में बलजीत ने जालंधर में हुई रेसलिंग चैंपियनशिप में अपने दम खम का लोहा मनवाया। वहीं द ग्रेट खली ने इनके हुनर को पहचाना और अपना स्टूडेंट बना लिया। अब वे इन्हें WWE के लिए तैयार कर रहे हैं। बलजीत ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि ग्रेट खली ने जालंधर में अपनी रेसलिंग अकादमी शुरु कर दी है तो वे सीधा जा पहुंचे उनका शार्गिद बनने। खली ने भी रिंग में उतारने से पहले उनको अच्छे से परखा।

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पहलवान बलजीत सिंह
खुद बलजीत बताते हैं कि ट्रेनिंग शुरु होने के दो माह बाद रिंग में उतरने का मौका दिया खली ने। जब रिंग में अपने हुनर का जलवा खली को दिखाया तो जाकर उन्होंने जालंधर में बीते दिनों हुई रेसलिंग चैपिंयनशिप में उतारा। यहां भी अपने मुक्कों का दम दिखाया तो अब जाकर डबल्यू डबल्यू ई में प्रतिभागी बनने के नजदीक हैं। खली तो बलजीत की इंट्री को लेकर उन्हें रिंग नेम भी दे दिया है। अब वह इसी नाम के साथ रिंग में उतरेगा।
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पहलवान बलजीत सिंह
बलजीत हरियाणा के फतेहाबाद जिले के सीनियर मॉडल स्कूल के स्टूडेंट रहे। एमएम पीजी कॉलेज से बीए की। उसके पिता हरजीत सिंह किसान है। मां रिछपाल कौर गृहिणी हैं। शुरु से ही रेसलिंग की दुनिया में छाने का ख्वाब देखा था, लेकिन आसान नहीं था पूरा करना। घर की माली हालत कमजोर होने के कारण उनके पास ट्रेनिंग के लिए भी पैसा नहीं था। पढ़ाई के बाद बलजीत ने अपना कंप्यूटर सेंटर खोल लिया।
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पहलवान बलजीत सिंह
बलजीत बताते हैं कि मन में पहलवानी करने का जोश था, इसलिए पैसे इकट्ठे करके सेंटर बंद कर दिया और रेसलिंग की तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया। बाहर के पहलवानों से लड़ने से पहले परिवार की उम्मीदों और डर से लड़ना पड़ा। उन्हें हर वक्त डर लगा रहता था कि रेसलिंग कहीं बलजीत को ही उनसे ना छीन ले। लेकिन अपनी धुन के पक्के बलजीत ने मानों ठान ली थी कि अब रेसलिंग के अलावा कोई लक्ष्य नहीं है।
 
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पहलवान बलजीत सिंह
बलजीत बताते हैं कि पहलवानी की दुनिया में नाम कमाने का चाव था। खली को देखा तो यह जोश और भी बढ़ गया। तब से मन में ठानी कि रेसलिंग सीखनी हो तो खली से। पांच महीने से उनके साथ हूं। उनसे पहलवानी के कई गुर सीखे हैं। अब इतना पक चुका हैं कि रिंग में पूरे आत्म विश्वास के साथ उतर सकता हूं। शुरूआत में परिवार वालों की ओर से भी रेसलिंग में जाने से रोका। अब खुश हूं कि अपने इरादों को पूरा करने के रास्ते पर चल पड़ा हूं।
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