कभी झोपड़ी में विराजमान हुआ था शिवलिंग, अब उसी जगह पर आलीशान मंदिर बन गया है और हर दिन अलग-अलग तरीके से शिव-शक्ति का श्रृंगार होता है।
जी हां! बात हो रही है चंडीगढ़ में सेक्टर 30 स्थित श्री शिव शक्ति मंदिर की। पहली बार मंदिर में सीमेंट के शिवलिंग का निर्माण हुआ था। एक ओर झोपड़ी में सीमेंट का शिवलिंग तैयार हो रहा था तो दूसरी ओर मंदिर की महिला मंडली मंदिर में पूजा का निमंत्रण भी दे रही थी। अगले दिन भव्य आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में भक्तों का आना शुरू हुआ जो आज तक जारी है।
यह बात वर्ष 1985-86 की है। मंदिर कमेटी की प्रधान शकुंतला शर्मा का कहना है कि उसके बाद प्रशासन ने मंदिर के लिए जमीन अलाट कर दी। धीरे धीरे भक्तों के सहयोग से भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया। दूर दूर से भक्त मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में झोपड़ीनुमा मंदिर के अंदर पानी चला जाता था। महिला मंडली पानी बाहर करती और फिर कीर्तन करती। धीरे धीरे भक्त बढ़ते गए और मंदिर का स्वरूप बदलते-बदलते आलीशान हो गया।
हर रोज नए तरीके से श्रृंगार
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि सावन के महीने में हर रोज अलग प्रकार से भगवान का श्रृंगार होता है। मंदिर में तीन पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री, कुलदीप वशिष्ठ और जितेंद्र तिवारी हैं। चार सेवादार भी मंदिर में हैं। मंदिर में अर्द्धनारीश्वर की मुख्य प्रतिमा है।
इसके अलावा शेरावाली मां, राधा कृष्ण, रामदरबार, हनुमानजी, नवग्रह, लक्ष्मी नारायण, गणेश, सरस्वती और महालक्ष्मी की भी प्रतिमा है। मंदिर में सभी त्योहार धूम धाम से मनाते हैं। मंदिर में धार्मिक प्रवचन भी होते हैं। विद्वान प्रवचनकर्ता मंदिर में प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हैं।
वर्ष में एक बार जरूर आते हैं भक्त
श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि सेक्टर 27, 28 और 30 में रहने वाले सरकारी अधिकारी या यहां से बाहर जाने वाले लोग वर्ष में एक बार मंदिर में दर्शन के लिए जरूर आते हैं।
सावन के महीने के अंतिम सोमवार को बाबा बर्फानी का स्वरूप बनेगा
पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि मंदिर में सावन के महीने के अंतिम सोमवार को बाबा बर्फानी का स्वरूप बनेगा। यह स्वरूप उन भक्तों के लिए है जो किसी कारणवश अमरनाथ की यात्रा पर नहीं जा सके थे। इस अवसर पर भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। भजन संध्या के बाद विशाल भंडारे का आयोजन होगा।