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टीवी पर एड में दिखने वाली ये बच्ची याद है न, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Thu, 26 Jan 2017 10:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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'ढोलना' गाने वाली यह बच्ची 10 साल की है
टीवी पर इस विज्ञापन को लगभग सभी ने देखा होगा लेकिन क्या विज्ञापन में दिखने वाली इस बच्ची की असल जिंदगी के बारे में जानते हैं? हैरान रह जाएंगे...
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सैमसंग टीवी के विज्ञापन में दिखने वाली लड़की प्रेरणा अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
टीवी पर एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी की एड में ‘तेरे बिन नहीं लगदा दिल मेरा ढोलना’ गीत गाकर सबका मन मोहने वाली बच्ची का नाम प्रेरणा हैं। वह चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल में पढ़ती है।
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सैमसंग टीवी के विज्ञापन में दिखने वाली लड़की प्रेरणा अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के धनास के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पांचवीं क्लास में पढ़ने वाली 10 साल की प्रेरणा किसी भी टॉपिक पर नॉनस्टॉप 45 मिनट तक बोल सकती है। राजनीति से जुड़े गंभीर विषयों पर भी वह अपनी बात बेबाकी से रखती हैं। 

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'ढोलना' गाने वाली यह बच्ची 10 साल की है - फोटो : अमर उजाला
छोटी सी दिखने वाली प्रेरणा की मैच्योर आवाज का जादू सोमवार को टैगोर थियेटर में दिव्यांग प्राइड फैशन शो में भी देखने को मिला। प्रेरणा ने सांसद किरण खेर की मौजूदगी में डिजिटल इंडिया और कैशलेस पर अपनी कविता पेश की। बिना रुके एक सधे हुए वक्ता की तरह प्रेरणा ने सभी के सामने अपनी बात रखी।
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'ढोलना' गाने वाली यह बच्ची 10 साल की है
छह बहनों में से प्रेरणा का दिमाग सबसे तेज चलता है। वह चीजों को जल्दी समझ लेती हैं। प्रेरणा की काबिलियत को जानकर उसे एड दिलाने वाले नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के प्रेजिडेंट विनोद चड्ढा ने बताया कि प्रेरणा को जन्म से ही दिखाई नहीं देता। 
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सैमसंग टीवी के विज्ञापन में दिखने वाली लड़की प्रेरणा अग्रवाल
चड्ढा ने बताया कि टीवी एड की कंपनी 12 से 17 साल की दृष्टिहीन लड़की चाहती थी। लेकिन जब वह 10 साल की प्रेरणा से मिले तो इसकी प्रतिभा के कायल हो गए। उसके बाद इसे मुंबई ले गए। प्रेरणा के साथ उसकी टीचर नीलम शर्मा भी गईं। 
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'ढोलना' गाने वाली यह बच्ची 10 साल की है
चड्ढा ने बताया कि मनाली के ब्लाइंड स्कूल को भी एड में दिखाया गया है। चड्ढा ने बताया कि प्रेरणा आईएएस बनना चाहती है। चड्ढा ने बताया कि दिव्यांग बच्चे खुद को दूसरों से अलग न समझें इसलिए आम स्कूलों में ही इन्हें पढ़ाया जाना चाहिए। वह अपने शिक्षक भेजकर इन स्कूलों में बच्चों स्पेशल क्लासेज दिलवाते हैं।
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