फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समझौता ट्रेन ब्लास्टः 10 साल बाद भी नहीं भरे घाव, 10 क्लिक में हादसे की कहानी

Mon, 20 Feb 2017 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट को आज 10 साल हो गए हैं, लेकिन लोगों के घाव अभी तक नहीं भरे। न ही अभी तक न्याय मिल पाया है, जानिए इस दर्दनाक हादसे की पूरी कहानी।
विज्ञापन

2 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
समझौता ट्रेन में बम ब्लास्ट की 10वीं बरसी हरियाणा के पानीपत में महराना गांव स्थित कब्रिस्तान में मनाई गई। धमाके में मारे गये 29 यात्रियों के शवों की उस वक्त शिनाख्त न होने पर पानीपत के गांव महराना स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया था। हर साल की तरह इस वर्ष भी उनकी आत्मा की शांति के लिए गांव महराना में शोक सभा का आयोजन किया गया। ब्लास्ट में मारे गए 69 लोगों की आत्मा की शांति के लिए कुरान की आयतें पढ़ी गई।
विज्ञापन

3 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने की बात होती है तो कोई न कोई घटना हो जाती है। ऐसी ही घटना 18 फरवरी 2007 की रात को ठीक उस समय हुई थी, जिस दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी भारत की यात्रा पर आने वाले थे। ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान जा रही थी। ट्रेन 11 बजकर 53 मिनट पर दीवाना रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो उसमें ब्लास्ट हो गया था, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी।

4 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
हादसे में मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी थे, जिन्हें पानीपत के शमशान में दफना दिया गया था। उनमें से आज भी 19 कब्र ऐसी हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। आज भी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं लोग। मामले की जांच पहले हरियाणा पुलिस और जीआरपी ने मिलकर की थी। 20 फरवरी, 2007 को पुलिस ने मामले में दो संदिग्ध लोगों के स्केच जारी किए थे। एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान के आधार पर पुलिस ने इन दोनों लोगों के स्केच जारी किए थे।
विज्ञापन

5 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
दोनों ही लोग दीवाना रेलवे स्टेशन पर रात लगभग 11 बज कर 40 मिनट पर उतर गए थे। इसके थोड़ी ही देर बाद ट्रेन में धमाके हुए। पुलिस ने इन संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी देने वालों को एक लाख रुपए का नकद ईनाम देने की भी घोषणा की थी, पर कोई फायदा नहीं हुआ था। जांच में सफलता नहीं मिलने के बाद साल 2011 में केस एनआईए को सौंप दी गई थी। जांच के दौरान ट्रेन मे और विस्फोटक साम्रगियां भी पाई गई।
विज्ञापन

6 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
जांच करते हुए एनआईए ने असीमानंद समेत दो लोगों को धमाके का मुख्य आरोपी बनाया था, जिसे एनआईए कोर्ट से जमानत मिल गई है। एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की पहले ही मौत हो चुकी है। केस में कुल 299 गवाह हैं, जिनमें 8 पाकिस्तान भी शामिल हैं। अभी तक केस में 174 लोगों की गवाही ली जा चुकी है। वहीं अब तक 17 गवाह अपने बयान से पलट चुके हैं।
विज्ञापन

7 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
असीमानंद पर अजमेर शरीफ, हैदराबाद के मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव में धमाके में शामिल होने के आरोप में सीबीआई ने उन्हें 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था। असीमानंद का जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में हुआ था उनके पिता देश के स्वतंत्रता सेनानी रह चुके थे। असीमानंद अपने 6 भाई-बहनों में से एक थे। छात्र जीवन में ही असीमानंद राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानि की आरएसएस से जुड़ गए थे।

8 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
फिजिक्स में स्नातक करने के बाद असीमानंद साल 1977 में आरएसएस के फुल टाइम प्रचारक बन गए थे। असीमानंद को ये नाम उनके गुरु स्वामी परमानंद ने दिया था। असीमानंद 1988 तक अपने गुरु के साथ बर्धवान में ही रहते थे। उसके बाद असीमानंद अंडमान निकोबार में चल रहे वनवासी कल्याण आश्रम की देख रेख के लिए वहां चले गए जहां उन्होंने एक हनुमान मंदिर की भी स्थापना की थी।

9 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
साल 1993 में अंडमान निकोबार से लौटकर असीमानंद गुजरात पहुंच गए, जहां वो स्थानीय आदिवासियों के कल्याण के लिए काम करने लगे और वहीं पर वो रामायण की सबरी की कहानियों से प्रेरित होकर सबरी मंदिर बनाया। 2007 में राजस्थान के अजमेर शरीफ में हुए ब्लास्ट केस में जब राजस्थान एटीएस ने देंवेंद्र गुप्ता नाम के शख्स को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की तो असीमानंद का नाम सामने आया।
विज्ञापन

10 of 10
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
देवेंद्र ने एटीएस को बताया कि इसके लिए उसे असीमानंद और सुनील जोशी नाम के शख्स ने अजमेर शरीफ और हैदराबाद के मक्का मस्जिद में ब्लास्ट करने के लिए उसपर दबाव डाला था। उसी वक्त राजस्थान एटीएस के रडार पर आए असीमानंद को 19 नवंबर 2010 को सीबीआई ने उसके हरिद्वार आश्रम से, अजमेर शरीफ, मक्का मस्जिद और समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें