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देखिए एकलौता पहलवान, जो कुश्ती में किसी से नहीं हारा, दोबारा कोई ऐसा नहीं जन्मा

Sun, 28 May 2017 09:18 AM IST
amarujala.com- Written by : खुशबू गोयल
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
देखिए देश का ऐसा एकलौता और दुनिया का महान पहलवान, जो कुश्ती में कभी किसी से नहीं हारा। न ही इसके जैसा दूसरा पहलवान आज तक नहीं जन्मा।
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
ये पहलवान आजकल चर्चा में है, क्योंकि सुपरस्टार सलमान खान प्रोड्यूसर बनने जा रहे हैं और वे पंजाब में जन्मे इस पहलवान पर टीवी सीरीज बनाएंगे। ये है मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा। सलमान के भाई सोहेल खान पहलवान गुलाम मोहम्मद का किरदार निभाएंगे। सीरीज की पृष्ठभूमि गुलाम मोहम्मद के होम टाउन अमृतसर के इर्द-गिर्द होगी। टीवी सीरीज का पायलट एपिसोड एक टीवी चैनल को सौंप भी दिया गया है।
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
गामा पहलवान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक थे। 1878 में पंजाब के अमृतसर शहर में मशहूर पहलवान मोहम्मद अजीज के घर गुलाम मोहम्मद का जन्म हुआ था। सभी प्यार से उन्हें 'गामा' कहकर बुलाते थे। पहलवान पिता मुहम्मद अजीज बक्श की मौत के बाद दतिया के महाराज ने गामा को पेशेवर पहलवान बनाने के लिए अपने पास रख लिया।

 

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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
पहलवानी के गुर सीखते हुए गामा ने महज 10 साल की उम्र में ही कई महारथियों को धूल चटा दी। गामा युवावस्था में थे और उनके सामने आने वाला हर पहलवान धूल चाट लौटता था। 1895 में उनका सामना देश के सबसे बड़े पहलवान रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ। रहीम की लंबाई 6 फुट 9 इंच थी, जबकि गामा सिर्फ 5 फुट 7 इंच के थे लेकिन उन्हें जरा भी डर नहीं लगा।
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
गामा ने रहीम से बराबर की कुश्ती लड़ी और आखिरकार मैच ड्रॉ हुआ। इस लड़ाई के बाद गामा पूरे देश में मशहूर हो गए। गामा ने 1898 से लेकर 1907 के बीच दतिया के गुलाम मोहिउद्दीन, भोपाल के प्रताब सिंह, इंदौर के अली बाबा सेन और मुल्तान के हसन बक्श जैसे नामी पहलवानों को लगातार हराया। 1910 में एक बार फिर गामा का सामना रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ। एक बार फिर मैच ड्रॉ रहा।
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
अब गामा देश के अकेले ऐसे पहलवान बन चुके थे, जिसे कोई हरा नहीं पाया था। भारत में अजेय होने के बाद गामा ब्रिटेन गए। वहां उन्होंने विदेशी पहलवानों को धूल चटाने का मन बनाया लेकिन लंबाई कम होने की वजह से उन्हें वेस्टर्न फाइटिंग में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद, गामा ने वहां के सभी पहलवानों को खुली चुनौती दी लेकिन लोगों ने इसे मार्केटिंग की चाल समझकर तवज्जो नहीं दी।
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
आखिरकार, गामा ने वहां के सबसे बड़े पहलवानों स्टैनिसलॉस जबिश्को और फ्रैंक गॉच को चुनौती दे डाली। चैंपियन स्टैनिसलॉस ज़बिश्को ने चुनौती स्वीकार कर ली और 10 सितंबर 1910 को फाइट हुई। गामा ने ज़बिश्को को पहले मिनट में जमीन पर पटक दिया। 2 घंटे 35 मिनट तक मैच चला, लेकिन उसे ड्रॉ करार दे दिया गया। मैच दोबारा 19 सितंबर को हुआ और ज़बिश्को मैच में आने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाया।

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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
इस तरह, गामा वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पहलवान बन गए। यह खिताब रुस्तम-ए-जमां के बराबर था। 1911 में गामा का सामना फिर रहीम बक्श से हुआ। इस बार रहीम को गामा ने चित कर दिया। 1927 में गामा ने आखिरी फाइट लड़ी। उन्होंने स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन को हराकर खेल को अलविदा कह दिया। दिलचस्प बात यह रही कि 50 साल के करियर में गामा को कोई हरा ही नहीं सका।

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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
बताया जाता है कि ब्रूस ली खुद गामा पहलवान से प्रभावित थे और गामा पहलवान से ही ब्रूस ली ने डील डौल बनाने के टिप्स लिए थे। गामा पहलवान एक दिन में हजार दण्ड बैठक लगाते थे। उनकी डायट में छह देशी चिकन, 10 लीटर दूध, आधा किलो घी और बादाम का टॉनिक होता था। दिन में 5000 बैठक और 1000 से ज्यादा दंड लगाना उनके ट्रेनिंग शेड्यूल में शुमार था।
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मशहूर पहलवान गुलाम मोहम्मद यानि ग्रेट गामा
गामा अपनी टीनएज में ही एक दिन में 5000 से ज्यादा बैठक लगाते थे। उनकी ताकत का यही राज था, कड़ी मेहनत। बंटवारे के समय उनका परिवार अमृतसर से लाहौर चला गया था। 23 मई 1960 को लाहौर में ही उनका निधन हुआ। जिस भार से गामा पहलवान वर्जिश किया करते थे, उस 95 किलो के भार को पटियाला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स म्यूजियम में आज भी सुरक्षित रखा गया है।
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