साक्षी मलिक पहलवान सत्यव्रत कादियान से शादी कर रही हैं, जो उनसे एक साल छोटे हैं। इनकी लव स्टोरी भी काफी रोमांटिक है, जो अखाड़े से शुरू हुई थी।
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पहलवान साक्षी मलिक की शादी
सत्यव्रत का जन्म 9 नवंबर 1993 को रोहतक (हरियाणा) में हुआ। ऐसे में सत्यव्रत उम्र में साक्षी से करीब 1 साल छोटे हैं। इस समय सत्यव्रत 24 साल के हैं, जबकि साक्षी 25 वर्ष की हैं। सत्यव्रत को कुश्ती विरासत में मिली। पिता अर्जुन अवॉर्डी सत्यवान कादियान ओलिंपिक में देश को एक नाम, एक विशेष पहचान दिला चुके हैं, चाहते थे सत्यव्रत भी उनके पदचिन्हों पर चले।
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गीता-साक्षी का शादी पर कुश्ती को लेकर बड़ा फैसला
इसी के चलते बहुत छोटी उम्र में सत्यवान ने अपने पिता की अंगुली पकड़कर अखाड़ा जाना शुरू कर दिया था। सत्यव्रत को पिता ने बतौर कोच प्रशिक्षण दिया। कुश्ती के गुर सिखाए और अपनी तरह फ्री-स्टाइल हैवीवेट वर्ग के लिए तैयार किया। बाद में 6 फीट ऊंचे कद के सत्यव्रत ने 97 से 100 किग्रा भारवर्ग में अपनी अलग पहचान बना ली।
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साक्षी मलिक और सत्यव्रत कादियान की अनोखी लव स्टोरी
पिता की मेहनत तब रंग लाई जब पहली बार सत्यव्रत ने यूथ ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही 100 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक भी जीत लाए। जब सत्यव्रत ने पहला अंतराष्ट्रीय पदक जीता, तब उनकी उम्र महज 17 साल थी। 2014 में उन्हें विनोद कुमार के रूप में नया कोच मिला, जो कि सत्यव्रत के पिता सत्यवान के साथ ओलिंपिक में भाग ले चुके हैं।
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Sakshi malik with satyawart kadian
- फोटो : अमर उजाला
हैवीवेट वर्ग की कुश्ती में सत्यव्रत किस्मत के मामले में बड़े लकी माने जाते हैं। 20 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लगातार पदक जीतने वाले सत्यव्रत का सपना भविष्य में ओलिंपियन सुशील कुमार की तरह सर्वश्रेष्ठ पहलवान बनना है। सुशील से काफी प्रभावित रहे सत्यव्रत को अनेक राष्ट्रीय शिविरों में उनके साथ अभ्यास करने का मौका मिला। फ्री-स्टाइल पहलवान सत्यव्रत कुश्ती के दम पर देश-दुनिया में नाम कमा चुके हैं।
कटरा, जम्मू में रुस्तमे-ए-इंटरनेशनल दंगल का खिताब जीतने वाले बिनिया बिन और परविंदर के बाद वे तीसरे भारतीय पहलवान हैं। महज 21 साल की उम्र में सत्यव्रत ने विजेता का पट्टा पहना। इस अंतरराष्ट्रीय दंगल में वे इंग्लैंड व यूक्रेन के पहलवानों को पटखनी दे चुके हैं। रेलवे में बतौर टीई नियुक्त सत्यव्रत कादियान देश को राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर मेडल दिला चुके हैं।
सत्यव्रत को उनकी उपलब्धियों के लिए अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया था। सत्यव्रत कादियान 97 किलो वेट कैटेगरी में खेलते हैं। पहलवान सत्यवान कादियान ही सत्यव्रत और साक्षी के गुरु हैं। इसके अलावा, सत्यव्रत भारत केसरी और चंबल केसरी जैसे खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं। साक्षी ने रियो ओलिंपिक में 12वें दिन भारत का ब्रॉन्ज मेडल के साथ खाता खोला था।
साक्षी बताती हैं कि पहलवान सत्यवान के अखाड़े में ही साक्षी और सत्यव्रत पहली बार एक दूसरे से मिले और फिर मुलाकातों का सिलसिला चला। 24 साल के सत्यव्रत ने भी बताया कि साक्षी से उनकी मुलाकात ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुई थी। वहां भारतीय खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। मैंने और साक्षी दोनों ने सिल्वर मेडल जीता, लेकिन वो गोल्ड न जीत पाने के कारण निराश थी।
मुलाकातों का दौर बढ़ा और उनके बीच नजदीकियां भी। प्यार हुआ और उन्होंने शादी करने का फैसला ले लिया। बता दें कि साक्षी की लव स्टोरी सलमान खान की फिल्म 'सुल्तान' की कहानी से मेल खाती है सत्यव्रत कादियान के साथ इनकी लव स्टोरी, जो शुरू हुई अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान सत्यवान के अखाड़े में। अखाड़े में कुश्ती सीखते-सीखते साक्षी कब अपने से छोटे पहलवान सत्यव्रत से प्यार कर बैठी पता ही नहीं चला।
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साक्षी मलिक की शादी
सत्यव्रत बताते हैं कि एक पहलवान होने के नाते हमारी सामान्य जान पहचान थी, सो मैंने साक्षी को समझाया और कहा कि हर हार हमें कुछ सिखाती है, हमारी मंजिल राष्ट्रमंडल खेल नहीं ओलंपिक है। मेरी यह बात साक्षी के दिल को छू गई और वह उत्साह से भर गई। उसके बाद हम दोनों साथ साथ वहां से लौटे। धीरे-धीरे सामान्य सी जान पहचान गहरी दोस्ती में बदल गई। फिर हम इंटरनेशनल चैंपियनशिप में साथ-साथ जाने लगे।
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ओलंपियन पहलवान साक्षी मलिक
इस तरह हमारी दोस्ती मजबूत होती गई और फिर एक दिन हमने एक दूसरे का हमसफर बनने का निर्णय कर लिया। लेकिन उससे पहले हमारा लक्ष्य ओलिंपिक मेडल था। हम रियो में भी साथ होते, लेकिन महज एक सेकेंड से मैं चूक गया। सत्यव्रत ने बताया कि साक्षी ओलिंपिक मेडल जीतने के बाद भी बहुत सहज और सरल है। वह हमेशा जमीन से जुड़ी रहती है। उसका नेचर दूसरों से बिलकुल अलग है।
सत्यव्रत ने कहा कि कुश्ती को लेकर उसमें गजब का समर्पण है। वह जो ठान लेती है करके रहती है। साक्षी मलिक के अनुसार सत्यव्रत बहुत अच्छे पहलवान हैं। सत्यव्रत काफी सहयोगी हैं, जो कदम-कदम पर उनका हौसला बढ़ाते हैं। शादी के बाद हमारा लक्ष्य देश के लिए मेडल जीतना है। पहले हम 15 दिसंबर से शुरू हो रही प्रो कुश्ती लीग में खेलेंगे। फिर राष्ट्रमंडल खेल 2018 और 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए मेहनत करेंगे।