क्या आपको पता है कि योगासन बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता बढ़ाने में मददगार होते हैं। जानिए चार आसन, जो अस्थमा को जड़ से मिटा देंगे।
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अस्थमा
अस्थमा एक ऐसा रोग है, जिसे पूरी तरह से ठीक कर पाना बेहद कठिन है। यदि बीमारी के प्रति जागरूक रहे तो इसे आसानी से काबू किया जा सकता है। अस्थमा से न सिर्फ व्यस्क पीड़ित होते हैं, बल्कि बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे ज्यादा ध्यान मरीज को खुद रखना पड़ता है। उन्हें ही अच्छी तरह से पता रहता है कि किससे उन्हें एलर्जी और किससे नहीं।
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क्यों बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस सीजन में अस्थमा अटैक के तीन से चार गुना मरीज बढ़ते हैं, क्योंकि आसपास के इलाकों में गेहूं की कटाई होती है। इसका असर चंडीगढ़ में भी दिखता है। पीजीआई व चंडीगढ़ के क्लीनिक में इस सीजन में अचानक से अस्थमा पीड़ितों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में पीड़ितों को चाहिए कि वे ज्यादा न निकलें।
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अस्थमा का कारण
पशुओं की त्वचा, बाल व रोए। घास व पौधों के पराग व धूल के कणों से। सिगरेट के धुएं व वायु प्रदूषण से। ठंडी हवा या मौसमी बदलाव से। पेंट की गंध, परफ्यूम या रूम फ्रेशनर से। भावनात्मक मनोभाव (जैसे रोना या लगातार हंसना) और तनाव से। वंशानुगत कारण। गर्भावस्था में यदि महिला तंबाकू के धुएं के बीच में रहती है, तो उसके बच्चे को अस्थमा हो सकता है।
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- फोटो : डेमो
ये उठाएं कदम
मरीज को खुद का ध्यान रखने की बेहद जरूरत है। धूल मिट्टी से दूर रहे। घर पर ही रहें। पालतू जानवर से दूर रहे हैं। पालतू कुत्ते को हर हफ्ते नहलाएं। साफ-सफाई का काम न करें। इससे उड़ने वाली धूल परेशान कर सकती है। धूम्रपान बिलकुल न करें. अगर आपके घर में कोई करता है, तो उसे भी इससे दूर रहने के लिए कहें। डाक्टरी सलाह पर रोज व्यायाम करें। अपना इन्हेलर अपने पास रखें। डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही योग या एक्सरसाइज करना शुरू करें।
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क्या नहीं खाना चाहिए
दूध और दूध से बने पदार्थ दमा के साथ नहीं चल सकते। ज्यादातर लोगों में दमा की 60 फीसदी वजह दूध और दूध से बने पदार्थ ही होते हैं। अगर दमा के मरीज दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करना बंद कर दें तो उनका आधा रोग तो तुरंत ही अपने आप ठीक हो सकता है। इसके अलावा केला, कटहल, पकाई हुई चुकंदर न लें। कच्ची चुकंदर ले सकते हैं। मौसमी सेम या फलियां, लोबिया आदि भी नुकसान दायक हैं।
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- फोटो : demo pic
क्या खाना चाहिए
शहद से शरीर को आवश्यक गर्मी मिलती है। शहद और काली मिर्च गर्म पानी के साथ लेने से दमा के दौरे को टाला जा सकता है। अगर यही प्रयोग लगातार किया जाए तो आपको दमा के दौरों से छुटकारा मिल सकता है। नीम के पत्ते को शहद में लपेटकर रोजाना सुबह ले सकते हैं। शहद और भीगी हुई मूंगफली श्वसन नली से बलगम को हटा देती है। तुलसी के कुछ पत्ते शहद और काली मिर्च में भिगोकर चबा लें। इससे दमा का दौरा पड़ने की आशंका बेहद कम हो जाएगी। इसके अलावा रोजाना योगा और प्राणयाम करना चाहिए।
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चार आसन असरकारक
अनुलोम-विलोम में सांस लेने की विधि को दोहराया जाता है। शुरू में इसे तीन मिनट तक और आदत पढ़ने के बाद 10 मिनट तक करना शुरू करें। उत्तानासन में आपको झुक कर खड़ा होना होता है। इससे दमा में आराम तो मिलता ही है साथ कब्ज आदि की समस्या भी दूर होती है। शवासन सबसे आसान आसनों में से एक माना जाता है। इससे दमा के साथ-साथ तनाव भी दूर होता है। अर्धमत्स्येन्द्रासन से फेफड़ों में आराम से ऑक्सीजन जाती है। दमा रोगियों के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद रहता है।
अस्थमा पीड़ित मरीजों को चाहिए कि वे जागरूक रहें। जिनसे उन्हें एलर्जी हैं, उनसे दूर रहे। डाक्टरों के संपर्क रहे। बराबर उनकी सलाह लेते रहें। पीएफटी टेस्ट कराते रहे हैं। इससे अस्थमा के स्तर का पता चलता है। - डा. संचित कुमार, कंसलटेंट चेस्ट डिपार्टमेंट इंडस हास्पिटल मोहाली