रमजान के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं उन सिख परिवारों की कहानी, जिन्होंने मुस्लिम परिवारों के लिए वो काम किया कि कोई सोच भी नहीं सकता।
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हिंदू-सिख परिवारों ने कौमी भाईचारे की शानदार मिसाल पेश की
पंजाब के लुधियाना में गांव गालिब रण सिंह के हिंदू-सिख परिवारों ने कौमी भाईचारे की शानदार मिसाल पेश की। उन्होंने रमजान महीना शुरू होने से पहले मुसलिम भाईचारे को मस्जिद बनवाकर दी है। पंचायत ने इसके लिए बाकायदा जमीन दी। तैयार हो चुकी इस खूबसूरत मस्जिद में वीरवार को पहली नमाज पढ़ी गई।
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रमजान (फाइल फोटो)
नमाज अदा कराने पहुंचे लुधियाना की शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने जज्बाती होकर कहा कि मेरा मुल्क और उसमें मिल-जुलकर रहने वाले लोग बेमिसाल हैं। गांव गालिब रण सिंह लुधियाना के सांसद रहे स्व. गुरचरण सिंह गालिब के गांव गालिब के नजदीक है। यहां मुसलिम भाईचारे के बमुश्किल दस-बारह घर हैं। जो गांव में कोई मस्जिद होने की वजह से इबादत के लिए दूसरे गांवों में जाते थे।
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रमजान के जुमे में मस्जिद में नमाज पढ़ते लोग
- फोटो : अमर उजाला
यह देखते हुए गांव के सरपंच हरसिमरन सिंह बाली ने नेक पहल की। उन्होंने मौलाना हबीब से इस बाबत बातचीत कर गांववालों की तरफ से मस्जिद बनवाकर देने का प्रस्ताव रखा। गांव वालों ने बाकायदा मुस्लिम परिवारों के साथ मिलकर मस्जिद का निर्माण कराया। वीरवार को एक सादे समारोह के दौरान सरपंच और गांववालों ने शाही इमाम से मस्जिद का उद्घाटन कराया।
रमजान के जुमे में मस्जिद में नमाज पढ़ते लोग
- फोटो : अमर उजाला
शाही इमाम के प्रवक्ता मुस्तकीम अहरारी के मुताबिक, जगरांव के गांव मल्ला, हांस कला, गालिब कलां और रण सिंह गालिब के अलावा सरवरपुर-समराला, रायपुर-कूमकलां में हिंदू-सिख परिवारों ने मस्जिदों को आबाद कराया। एसजीपीसी के प्रधान रहे स्व.जगदेव सिंह तलवंडी के गांव में भी एक मस्जिद इसी तरह आबाद हुई। जबकि मोगा के गांव अजीतवाला में भी ऐसी ही मिसाल पेश की गई।