30 दिन, पांच वक्त की नमाज और जकात, ये है अल्लाह की इबादत का पवित्र (पाक) और रहमतों वाला महीना रमजान, जो मंगलवार से शुरू हो रहा है। जानिए कुछ खास बातें...
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रमजान मुबारक
रमजान का मुबारक महीना हर मुसलमान के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इस पूरे महीने (30 दिन) लोग रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत व पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ की तिलावत करते हैं। इस्लामिक कैलेंडर में चांद के अनुसार महीने और दिन गिने जाते हैं। इस्लामिक कैलेंडर में नौवां महीना रमजान का होता है। रविवार को मुस्लिम समाज के लोगों को चांद नहीं नजर आया। ऐसे में अब सोमवार को चांद देखा जाएगा। सोमवार को चांद नजर आ गया तो मंगलवार को पहला रोजा रखा जाएगा।
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रमजान मुबारक
- फोटो : amar ujala
हालांकि लोगों ने रोजा रखने की तैयारी कर ली है। इसके लिए जरूरी सामान की खरीदारी भी रविवार को कर ली गई। चंडीगढ़ में सेक्टर-26 स्थित नूरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि इस्लाम में रमजान का महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है। यह इबादत और रहमतों वाला महीना है। हर मुसलमान को इस महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस पाक महीने में हर मुसलमान को चाहिए कि वह रोजा रखे और अपने रब की इबादत करे।
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रमजान मुबारक
- फोटो : अमर उजाला
इस्लाम के मुताबिक, पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जो पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है। अशरा अरबी का 10 नंबर होता है। इस तरह रमजान के पहले 10 दिन (1-10) में पहला अशरा, दूसरे 10 दिन (11-20) में दूसरा अशरा और तीसरे दिन (21-30) में तीसरा अशरा होता है। इस तरह रमजान के महीने में 3 अशरे होते हैं। पहला अशरा रहमत का होता है। दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का, जबकि तीसरा अशरा जहन्नुम (नर्क) की आग से खुद को बचाने के लिए होता है।
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रमजान मुबारक
- फोटो : अमर उजाला
रमजान के महीने को लेकर पैगंबर मोहम्मद ने कहा है, रमजान की शुरुआत में रहमत है, बीच में मगफिरत यानी माफी है और इसके अंत में जहन्नुम की आग से बचाव है। मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि रमजान में पांच वक्त की नमाज के साथ रात में इशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। इसमें पवित्र कुरान को पढ़ा जाता है। रमजान में जकात (दान) दी जाती है। साथ ही इंसानियत और पूरी दुनिया की सलामती के लिए दुआएं मांगी जाती हैं।
इस पवित्र महीने में एक रात आती है जिसे शब-ए-कद्र कहा जाता है। यह एक हजार महीनों से भी बेहतर है। यह महीना नेकियों और इबादतों का महीना है। सेक्टर-20 के जामा मस्जिद के इमाम और खतीब मौलाना अजमल खान ने बताया किरमजान की हर घड़ी पवित्र, कीमती और नेकियों से भरी हुई होती है, लेकिन जब रमजान में जुमे (शुक्रवार) का दिन आता है तो पवित्रता और बढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे नूर और रहमत का संगम हो गया हो।