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रक्षा सूत्र कार्यक्रमः बच्चों के 21 सवाल, ACP के दिलचस्प जवाब

Wed, 11 May 2016 09:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम पुलिस की पाठशाला में बच्चों ने 21 ऐसे सवाल पूछे, जिनके एसीपी ने दिलचस्प जवाब दिए। हेलमेट अपने लिए पहनो न कि पुलिस से बचने के लिए। यह कहना है पंचकूला ट्रैफिक पुलिस के एसीपी मुनीष सहगल का। दून पब्लिक स्कूल सेक्टर-21 में पुलिस और स्टूडेंट्स के बीच संवाद कायम करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

 
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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
रक्षा सूत्र कार्यक्रम के दौरान दून पब्लिक स्कूल के प्राचार्य कैप्टन संजय आनंद, वाइस प्रिंसिपल सुनीता आनंद और स्कूल का स्टाफ मौजूद रहा। दून पब्लिक स्कूल सेक्टर-21 पंचकूला के स्टूडेंट्स ने एसीपी मुनीष सहगल से खूब सवाल किए। रक्षासूत्र के दौरान स्टूडेंट्स ने एसीपी से ट्रैफिक से संबंधित जानकारी हासिल की। इस मौके पर स्कूल के प्राचार्य कैप्टन संजय आनंद ने भी कहा कि स्टूडेट्स को नियमों के अनुसार ही ड्राइविंग करनी चाहिए।
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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
एसीपी ने स्टूडेंट्स से पूछा कि कितने लोग व्हीकल ड्राइव करते हैं तो ज्यादातर बच्चो ने अपने हाथ उठा दिए। एसीपी ने कहा कि जब आप नाबालिग हैं तो व्हीकल क्यों ड्राइव करते हैं। ऐसी स्थिति में आपको कोई नुकसान हो जाए तो क्या होगा? उन्होंने कहा कि यदि नियम बनाए गए हैं तो उनको फालो भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने नाबालिग बच्चों को गाड़ियां  नहीं देनी चाहिए।

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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
एसीपी ने कहा कि हेलमेट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा जरूरी है। यह पुलिस वालों से बचने के लिए नहीं लगाना चाहिए बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए लगाना चाहिए। एसीपी ने कहा कि मुंह पर दुपट्टा बांधकर लड़कियों को ड्राइव नहीं करनी चाहिए वरना इससे एक्सीडेंट का खतरा रहता है। 
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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
पीयूष-जब भी कोई वीवीआईपी आते हैं तो ट्रैफिक रोककर पब्लिक को क्यों परेशान करते हैं?
एसीपी-यह प्रोटोकाल ड्यूटी है। पब्लिक ने जनप्रतिनिधि चुना है, जिसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। ऐसी स्थिति में भी हम यह ख्याल रखते हैं कि लोगों को ज्यादा परेशानी न हो और इसके लिए रूट डायवर्ट भी कर देते हैं। एबुलेंस भी हम नहीं फंसने देते।
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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
चिराग-आन ड्यूटी क्यों सोते हैं पंचकूला के पुलिसकर्मी जबकि चंडीगढ़ में ऐसा नहीं?
एसीपी-पंचकूला में करीब साढ़े तीन सौ पुलिस कर्मी हैं और चंडीगढ़ में छह हजार, पंचकूला का एरिया भी ज्यादा है। पंचकूला में शिफ्ट वाइज ड्यूटी नहीं हैं। यहां ट्रैफिक प्वाइंट ज्यादा हैं और स्टाफ कम है। पुलिस कर्मी भी इंसान हैं, झपकी आ सकती है।
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अमर उजाला फाउंडेशन का रक्षा सूत्र कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
चिराग-मैं और मेरे पापा चंडीगढ़ में रांग साइड जा रहे थे तो किसी पुलिस कर्मी ने पीछे से हिट किया?
एसीपी-किसी भी पुलिसकर्मी को हिट करने का अधिकार नहीं, वह रोककर चालान तो कर सकता है लेकिन हिट नहीं। आपको इसकी शिकायत करनी चाहिए थी।

 

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चिराग-ट्रैफिक पुलिस नियम तोड़ने पर सौ रुपये में छोड़ देती है?
एसीपी-आपती को ऐसा कतई नहीं करना चाहिए, रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध है।

कार्तिक-पासपोर्ट वेरीफिकेशन के लिए पुलिस पैसे क्यों लेती है?
एसीपी-ऐसा नहीं है, पुलिस के ऊपर अब समयबद्ध काम करने की बाध्यताएं हैं। पंद्रह दिन के भीतर हमको रिपोर्ट देनी होती है।
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राधिका-पुलिस कर्मी रिश्वत क्यों लेते हैं?
एसीपी-क्या आपने किसी पुलिस कर्मी को रिश्वत लेते देखा है?
राधिका-मैने लोगों से सुना है।
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