पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला ने समाज के कल्याण के लिए एक और महत्वपूर्ण खोज की है, जिसक लिए उसे इंडियन पेटेंट भी हासिल हो गया है।
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Milk
- फोटो : Pixabay
यूनिवर्सिटी ने दूध में मिलावट के लिए कितनी मात्रा में यूरिया मिलाया गया है, उसका पता लगाने के लिए एक बायो सैंसर उपकरण बनाया है। वीसी डॉ. बीएस घुम्मन ने डॉ. मिनी सिंह की अगुवाई वाली खोज टीम, जिसमें बायोटैक्नोलाजी विभाग से डॉ. नीलम और डॉ. वरूण ठक्कर शामिल हैं, उनको इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल सिंथेटिक दूध बनाने के लिए आमतौर पर यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। कोरोना काल में लोग मिलावट वाला ऐसा दूध पीने से बच सकें, इस दिशा में भी पीयू की इस खोज को अहम माना जा सकता है। पीयू की खोज टीम की ओर से तैयार किए बायो सैंसर उपकरण जरिये अब जल्दी व आसान तरीके के साथ ऐसी मिलावट बारे पता लगाया जा सकता है।
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दूध
- फोटो : PTI
इससे पहले डॉ. मिनी सिंह की अगुवाई वाली खोज टीम ने दूध में आसानी से घुल जाने वाली लिक्विड हल्दी की फार्मूलेशन तैयार की थी। इस हल्दी की फार्मूलेशन की खास बात यह थी कि घुलनशील होने के साथ-साथ यह दूध में डालकर पीने से कडवी भी नहीं लगती है। वीसी डॉ. घुम्मन ने कहा कि दूध में यूरिया की मिलावट संबंधी इस खोज ने साबित कर दिया है कि यूनिवर्सिटी समाज की भलाई में बड़ा योगदान डाल रही है।
साथ ही कहा कि यूनिवर्सिटियों में किए जाने वाले शोध का असल लाभ तब ही होता है, जब यह आम लोगों की भलाई के काम आ सके। योजना व निरीक्षण मामलों बारे डायरेक्टर डॉ. अशोक मलिक ने कहा कि पीयू को हासिल पेटेंट में से सबसे ज्यादा पेटेंट बायोटेक्नोलाजी विभाग के पास ही हैं।