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तस्वीरें: यह है चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल का हाल, यहां इलाज बाद में...संक्रमण पहले मिलेगा

Sat, 01 Aug 2020 03:51 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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जीएमएसएच-16 - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग भले ही अस्पतालों में कोरोना से बचाव के इंतजाम के दावे कर रहा है लेकिन हकीकत और है। हाल यह है जीएमएसएच-16 की गाइनी डिपार्टमेंट की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मरीज और तीमारदार सभी नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल में एक साथ बैठ रहे हैं और आवाजाही कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अफसर बैठते हैं। ऐसे में अस्पताल में कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा है। 
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शुक्रवार को जीएमएसएच-16 में गाइनी डिपार्टमेंट के बाहर काफी लोग बैठे हैं। इस दौरान लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। अस्पताल का स्टाफ और तैनात सुरक्षाकर्मी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही डॉक्टरों की भी आवाजाही है लेकिन कोई भी इस बात की जरूरत महसूस नहीं कर रहा कि मरीजों और तीमारदारों से यह कहा जाए कि सोशल डिस्टेंस बनाकर बैठें। ऐसी स्थिति में कोरोना का संक्रमण फैलना तय है। इस बाबत अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके स्तर पर हर जगह संक्रमण से बचाव की पूरी व्यवस्था की गई है लेकिन लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं।  
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सीन- 1  
जीएमएसएच 16 की इमरजेंसी के सामने बनाए गए फ्लू क्लीनिक में शुक्रवार की सुबह मरीजों की कतार लगी है। मरीज एक दूसरे से कुछ ही दूरी पर खड़े हैं। उनमें से कई लोगों को तेज बुखार, खांसी और जुकाम की शिकायत भी है। इस क्लीनिक में कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच कर लक्षण के आधार पर उन्हें कोरोना टेस्ट के लिए रेफर किया जाता है। इतने सेंसटिव स्थान पर सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी उस कतार में खड़े वायरल बुखार और सामान्य सर्दी जुकाम के मरीज बड़ी आसानी से कोरोना संक्रमित हो सकते हैं लेकिन लोगों को इसकी परवाह नहीं है। 

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सीन- 2  
अस्पताल इमरजेंसी के सामने मरीजों के साथ ही परिजनों की भीड़ इकट्ठा है। कुछ सामने बनाएं चबूतरे पर एक दूसरे के पास पास बैठे हुए हैं तो कुछ पेड़ की छांव में एकत्र हैं। वहां से डॉक्टरों के साथ ही अधिकारियों के गुजरने का क्रम जारी है लेकिन उन लोगों को कोई भी कोरोना से बचाव के प्रति आगाह करने की जहमत नहीं उठा रहा। इतना ही नहीं एंबुलेंस से आने वाले मरीजों को भी बिना किसी एहतियात के उनके परिजन अस्पताल के अंदर लेकर जा रहे हैं।  
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कोरोना महामारी जैसे संक्रमण के इस दौर में मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में की जा रही लापरवाही भारी पड़ सकती है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीज अनजाने में अपने साथ कोरोना का संक्रमण लेकर घर जा रहे हैं। शहर में लगातार तेजी से सक्रिय हो रही कोरोना की चेन के लिए ऐसी स्थिति काफी हद तक जिम्मेदार है। इस बाबत अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है की बीमारी के इलाज के लिए तो अस्पताल आना ही पड़ेगा लेकिन कोरोना से बचाव के लिए अस्पताल प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे मरीजों के सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठने और उन्हें संक्रमण से बचाव पूरी व्यवस्था करें।  
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कोरोना का टेस्ट हो रहा या बांटा जा रहा संक्रमण  
हॉस्पिटल में बनाए गए कोरोना टेस्टिंग सेंटर में जहां मरीजों का नमूना एकत्र करने की व्यवस्था है, वहां की स्थिति और भी चिंताजनक और गंभीर है। वहां जाने वाला हर संदिग्ध मरीज उस गेट को खुद ही खोलता और बंद करता है। अंदर जाकर नमूना देने के बाद वह हाथ बिना सेनेटाइज किए हुए वापस आता है। ऐसी स्थिति में वहां जाने वाले उन अन्य मरीजों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है, जो कोरोना संक्रमित नहीं हैं। 

मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इस यूनिट में गेट पर हाथों को सैनिटाइज कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि दरवाजा खोलने से किसी प्रकार के संक्रमण फैलने का कोई खतरा न रहे। वहीं टेस्ट कराने आने वाले मरीजों के बैठने की व्यवस्था सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुसार होनी चाहिए। मौजूदा समय में वहां चंद कुर्सियां ही हैं।    

अस्पताल में कोरोना से बचाव के मानकों की व्यवस्था करने के साथ ही उसका पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराया गया है। जहां तक सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी की बात है तो लोगों में जागरुकता का अभाव होने के कारण उसका शत प्रतिशत पालन नहीं हो पा रहा। - डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच-16
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