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स्टूडेंट्स की पर्सनल प्रॉब्लम्स, रिसर्च में खुलासे चौंकाने वाले

Tue, 30 Jun 2015 08:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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स्टूडेंट्स की पर्सनल प्रॉब्लम्स पर एक रिसर्च सामने आई है। स्टडी में चंडीगढ़ और हिमाचल के 247 स्टूडेंट से सवाल-जवाब किए गए। रिसर्च में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। आप भी देखिए।
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स्टूडेंट्स की पर्सनल प्रॉब्लम्स, रिसर्च में खुलासे चौंकाने वाले

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ये रिसर्च चंडीगढ़ में जीएमसीएच-32 के कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने करवाई। स्टडी में सामने आया है कि स्टूडेंट अपनी पर्सनल प्राब्लम पिता से बिल्कुल भी शेयर नहीं करते। वे या तो मां से बात करते हैं या फिर अपने दोस्तों से।
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रिसर्च में सामने आया है कि सिर्फ 48 प्रतिशत अपनी मां से प्राब्लम शेयर करते हैं, जबकि 37 प्रतिशत दोस्तों से। चार प्रतिशत अपने रिलेटिव से तो पांच प्रतिशत बड़ी बहन से। यही कारण है कि अधिकतर स्कूली स्टूडेंट्स (12-19 वर्ष के) घबराहट के शिकार हैं।

स्टूडेंट्स की पर्सनल प्रॉब्लम्स, रिसर्च में खुलासे चौंकाने वाले

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चंडीगढ़ के 153 विद्यार्थियों में से 130 ने बताया कि उन्हें हर काम करते हुए घबराहट होती है। यह लगभग 85 फीसदी है। स्टडी के दौरान एक्सपर्ट ने बताया कि 82 प्रतिशत स्टूडेंट चाहते हैं कि उन्हें एक्सपर्ट के जरिए काउंसलिंग दिलवाई जाए।
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यह काउंसलिंग उन्हें दोस्तों, फैमिली मेंबर और मेंटर से मिलनी चाहिए। रिसर्चरों का कहना है कि स्कूल लेवल पर स्टूडेंट को काउंसलिंग मिलनी जरूरी है। इसके अलावा स्कूल स्तर में किशारोवस्था से जुड़े हेल्थ प्रोग्राम चलाने चाहिए। इससे बेहतर परिणाम निकलकर सामने आएंगे।
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अधिकतर पेरेंट्स बच्चों की इस दिक्कत को नजरंदाज करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था की इस जैसी समस्याओं के कारण 18 फीसदी बच्चे नशे में पड़ जाते हैं। अपनी दिक्कतों से पार पाने के लिए वे शराब और धूम्रपान का सहारा लेते हैं और इस दलदल में फंसते चले जाते हैं। जब परेशान स्टूडेंट से पूछा गया कि क्या वे अपनी समस्याओं से उबरने के लिए काउंसलिंग की जरूरत समझते हैं तो आधे से ज्यादा स्टूडेंट का जवाब हां था।
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