राजद्रोह के आरोप में न्यायिक हिरासत में जेल गए प्रोफेसर विरेंद्र सिंह जमानत पर बाहर आने के बाद पहली बार अपने गांव बालंद पहुंचे।
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जमानत पर रिहा हो पहली बार अपने गांव पहुंचे प्रोफेसर विरेंद्र, बोले
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प्रोफेसर विरेंद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
यहां उन्होंने कई भावुक करने वाली बातें कही। उन्होंने कहा कि पिछला एक माह भयंकर मानसिक कष्ट झेला है। यह वक्त किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं था। मैं दस दिन पुलिस रिमांड में रहा। अब मैं अपने परिवार के बीच राजनीति पर चर्चा करने नहीं, दिल की बात करने आया हूं।
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प्रोफेसर विरेंद्र सिंह
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ग्रामीणों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर ने कहा कि मैं आज अपने परिवार के बीच खड़ा हूं। क्या उन्हें मैं देशद्रोही लगता हूं। मेरा केस अदालत में है और मैं अदालत में पूरा विश्वास रखता हूं। सच की जीत होगी। आपके बेटे ने बालंद का अन्न खाया है। वह टूट सकता है, लेकिन झुक नहीं सकता।
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प्रोफेसर विरेंद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
प्रोफेसर ने कहा कि जैसे ही बाहर आया मैं पहले अपने गांव रूपी मंदिर में आया, क्योंकि यहीं का अन्न खाकर बड़ा हुआ और समाज में सम्मान मिला। गाम राम होता है। मैं आप लोगों से वचन मांगता हूं कि किसी भी सूरत में आप सामाजिक भाईचारा समाप्त नहीं होने देंगे। मैं अपने भाईचारे के प्यार का बदला कभी नहीं उतार सकूंगा।
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प्रोफेसर विरेंद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
प्रोफेसर विरेंद्र सिंह ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि मैं भगवान को साक्षी मान कर कहता हूं कि मैंने और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश के अहित या दंगों को भड़काने जैसा कोई काम नहीं किया है। ऑडियो में मेरी आवाज थी, लेकिन मैंने ऐसा कौनसा शब्द कहा जिससे मारपीट, आगजनी, देश, बिरादरी या धर्म से जुड़ी बात थी।
जमानत पर रिहा हो पहली बार अपने गांव पहुंचे प्रोफेसर विरेंद्र, बोले
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प्रोफेसर विरेंद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ अपने इलाके में अशांति फैलाने वाले लोगों को हटाना चाहता था। मैने किसी मंच से भाषण या मीडिया को कोई बयान नहीं दिया।
इसके बावजूद मेरे फोन की रिकार्डिंग की गई, जोकि कानूनन अपराध है। उनकी रिकार्डिंग में बोले गए वाक्यों का दंगा भड़काने से कोई मतलब नहीं था। यह बात पुलिस ने भी मानी है। दो लोगों की फोन पर बातचीत को रिकॉर्ड करना और उसे सार्वजनिक करना कानूनन अपराध है।