कर्म का अमर संदेश देने वाले पवित्र ग्रंथ गीता के 5153वें जन्मोत्सव पर भारत रत्न तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भले एक घटना के कारण हरियाणा के कुरुक्षेत्र न पहुंच सके हों, मगर इससे पहले के आगमन को शक्तिपीठ भद्रकाली अमर बनाने जा रहा है। इस शक्तिपीठ में प्रणब मुखर्जी देश के दूसरे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने युगों पुरानी परंपरा को चांदी के घोड़े चढ़़ा कर निभाया था।