कांग्रेस और भाजपा की राजनीति के कारण नगर निगम सदन की बैठक हंगामेदार रही। न किसी मुद्दे पर चर्चा हुई और न ही कोई प्रस्ताव पास हुआ। करीब 25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे जाने थे। एक बैठक में नगर निगम का डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च आता है। बैठक में दोनों पक्षों ने जमकर तू-तू -मैं-मैं हुई ।
बैठक के दौरान पक्ष और विपक्ष में जमकर तू-तू -मैं-मैं हुई । इस दौरान सदन की गरिमा तार-तार होती रही। मेयर ने कहा कि कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने के लिए उन्हें मजबूर किया।
सदन की बैठक शोर शराबे के बीच दोपहर दो बजे तक चली ऐसे में मेयर अरुण सूद पर यह भी आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर किरकिरी से बचने के लिए बैठक स्थगित कर दी क्योंकि कांग्रेस पार्षद पानी की किल्लत और सेक्टर-17 की प्रमुख पार्किंगों को बंद करने के मामले को लेकर जमकर हंगामा कर रहे थे।
ऐसे में भाजपा से भी मेयर को ज्यादा रिस्पांस नहीं मिल रहा था। इसलिए मेयर को आभास हो गया कि यह हंगामा देर शाम तक चलेगा। मेयर ने विकास के प्रस्ताव पास न होने की बात कहते हुए बैठक स्थगित कर दी। जबकि कांग्रेस का कहना है कि मेयर ने शनिवार को जर्मनी जाना है इसलिए बैठक जल्दी स्थगित कर दी।
शहर में पानी की भारी किल्लत है, लेकिन बैठक में इसका कोई हल नहीं निकल पाया। कांग्रेस और भाजपा पार्षदों ने बैठक में एक दूसरे के खिलाफ जमकर अपशब्द कहे। इस दौरान कांग्रेस पार्षदों ने मेयर के लिए जज साहब, वकील साहब, राम भक्त और अरुण तक कहा। पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा ने मेयर को तू- तू कहकर संबोधित किया। सुभाष चावला ने कहा कि भाजपा झूठ बोलने वाली पार्टी है। पूर्व मेयर हरफूल चंद कल्याण ने भाजपा पार्षद सतीश कैंथ को छोटा भीम कह कर संबोधित किया।