सरकार ने आदेश जारी किए हैं कि कैशलेस सिटी बनाओ, लेकिन जमीन हकीकत ऐसी है कि जानकर लोगों के पांव तले से जमीन खिसक जाए।
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बैंक के बाहर लगी भीड़
हर साल काफी संख्या में बैंक उपभोक्ता प्लास्टिक मनी और ऑनलाइन ट्रांजक्शन में फ्राड का शिकार हो रहे हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की मदद मिलना और भी दुश्वार है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल में चार हजार से ज्यादा शिकायतें पुलिस को मिली हैं और सिर्फ 174 मामले ही पुलिस ने दर्ज किए हैं।
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बैंक के बाहर लगी लंबी कतार
ऐसे में लोगों को कैशलेस व्यवस्था के लिए मजबूर करना उन्हें साइबर अपराधियों के आगे चारे की तरह परोसने जैसा है। ट्राइसिटी में साइबर फ्राड और ऑनलाइन ट्रांजक्शन धोखाधड़ी कैशलेस व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा है। ट्राइसिटी में हर साल काफी संख्या में लोग इसका शिकार बन रहे हैं। इतना ही नहीं, ठगी का शिकार होने के बाद न उन्हें बैंकों से मदद मिलती है और न ही पुलिस से।
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बैंक के बाहर लगी लंबी कतार
- फोटो : amar ujala
साइबर मामलों के एक्सपर्ट राजेश राणा बताते हैं कि सबसे बड़ी जरूरत ऑनलाइन ट्रेडिंग के प्रति सुरक्षा की भावना पैदा करना है। लोग अभी कार्ड से पेमेंट करते हुए डरते हैं, क्योंकि ऑनलाइन फ्रॉड होने पर बैंक व पुलिस दोनों ही अपने हाथ खींच लेते हैं। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी कानून को और सख्त बनाना होगा।
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रुपये निकालने के लिए बैंक में लगीं कतारें
राजेश राणा बताते हैं कि अभी अगर आपका बैंक व किसी टेलीक़ॉम कंपनी से डाटा लीक होता है तो इस स्थिति में कोई ऐसा कानून नहीं है कि उस संस्थान के खिलाफ कार्रवाई हो सके। कंपनियां इसका फायदा भी उठाती हैं, मगर ये सब कैशलेस सिस्टम के प्रति लोगों के विश्वास को भी तोड़ता है। एटीएम विंडो एक्सपी पर चल रहे हैं, जो कि दो साल पहले ही बंद हो चुका है। इससे हैकर्स आसानी से एटीएम हैक कर सकते हैं।
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बैंक में पैसा निकालने के लिए जुटी भीड़
राजेश बताते हैं कि एटीएम हैक न हो, इसके लिए एटीएम में अपडेटेड वर्जन डालना बहुत जरूरी है। बैंकों में आवेदन के बाद स्वाइप मशीन मिलने में दस दिन से ज्यादा लग जाते हैं, जिस वजह से शहर में स्वाइप मशीनों की बड़ी कमी है। प्रशासन ऐसी नीति बनाए कि स्वाइप मशीन दो या तीन दिन में आसानी से मिल सके।
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bank
- फोटो : amar ujala
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए इंटरनेट की सुस्त रफ्तार भी एक बड़ी प्रॉब्लम है। राजेश राणा बताते हैं कि अगर शहर को देश का पहला कैशलेस सिटी बनाना है तो सबसे पहले इंटरनेट की रफ्तार को बढ़ाना होगा। अक्सर आरएलए व अन्य सरकारी संस्थाओं में देखा जाता है कि सर्वर डाउन है या इंटरनेट बहुत स्लो है, जिसकी वजह से साइट नहीं खुल रही है।
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बैक मे रूपया निकालने के लिए लगी भीड़
केस-1: सुबह पौने सात बजे सेक्टर-32 निवासी सरवन कुमार के मोबाइल फोन पर धड़ाधड़ चार एसएमएस आए तो उनके होश उड़ गए। एफसीआई हरियाणा में मैनेजर के पद पर तैनात सरवन के क्रेडिट कार्ड से किसी अज्ञात ने सिर्फ सात मिनट में 72 हजार रुपये की शॉपिंग कर डाली। एसएमएस पढ़ते ही वह सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन की तरफ भागे। थाने से उन्हें सेक्टर-17 साइबर सेल भेजा गया। साइबर सेल ने पुलिस हेडक्वार्टर एसएसपी पब्लिक विंडो पर शिकायत देने को कहा। इसके बाद वह सेक्टर-9 में एसएसपी पब्लिक विंडो पर मामले की शिकायत दी।
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बैंक के बाहर लगी भीड़
केस-2: फर्जी दस्तावेजों पर सिम भी ले लिया, खाते से निकाल लिए 31 लाख। नवंबर में ही सेक्टर-17 पुलिस स्टेशन में सेक्टर-17 के दीपक टेक्सटाइल के मालिक नवदीप बंसल ने शिकायत दी कि उनके खाते से किसी ने 31 लाख रुपये निकाल लिए हैं। जालसाज ने उनके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल कंपनी से सिम भी ले लिया था। इस कारण उनको ट्रांजेक्शन का पता ही नहीं चला।
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Que at bank
- फोटो : AmarUjala
चंडीगढ़ पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में अब तक साइबर सेल में 1341 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसमें साइबर पुलिस ने 37 केस दर्ज किए हैं। वहीं 28 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस साल ऑनलाइन चीटिंग के 23, इंश्योरेंस से जुड़े 5 और 3 केस फेसबुक के रजिस्टर किए हैं।
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बैंक में रुपये लेने के लिए लगी कतार।
साइबर सेल अधिकारियों का कहना है कि बैंकों को भी कई बार कहा गया है कि एक सेंट्रलाइज सेंटर स्थापित करें जहां पर किसी भी बैंक से संबंधित जानकारी एक ही जगह से ली जा सके। साइबर सेल में पुलिस कर्मचारियों की मांग है कि जैसे साइबर से जुड़े अपराधों में हर साल बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके लिए शहर में अलग से साइबर थाना बनना चाहिए, जिसमें पुलिस कर्मचारी भी ऐसे हों जोकि कंप्यूटर और इंटरनेट चलाने में माहिर हों। साथ ही कम से कम साइबर सैल के हर कर्मचारी के पास अपना एक अलग से लैपटॉप या डेस्कटॉप होना चाहिए।
ये सावधानियां बरतें: साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि किसी के भी कॉल करने पर उसे अपने क्रेडिट कार्ड व डेबिट कार्ड की जानकारी बिल्कुल न दें। क्योंकि कभी भी बैंक वाले फोन पर डिटेल नहीं मांगते। कभी अपना पिन नंबर किसी से सांझा न करें। हर दो-तीन महीने में अपने कार्ड का पिन नंबर बदलते रहें। क्रेडिट कार्ड पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सर्विस जरूर रखें। क्योंकि अगर आप का क्रेडिट कार्ड की सूचना किसी को मिल गई तो वह बिना पिन नंबर के ही ई वालेट बना कर ट्रांजेक्शन कर सकता है। ऑनलाइन सामान खरीदने पर पेमेंट हमेशा सामान हाथ में आने के बाद ही करें।