जीएसटी और जीएसटी रिटर्न को लेकर लोगों को कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। कई सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब नहीं मिले हैं, बताइए क्या करें?
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gst
केंद्र सरकार समय समय पर जीएसटी को लेकर बदलाव किए जा रही है। जिस कारण लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट की ओर से शुरू की गई जीएसटी हेल्पलाइन नंबर पर जीएसटी से संबंधित जानकारी के लिए रोजाना 40 से 50 कॉल आ रहे हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर व्यापारी वर्ग अभी भी दुविधा में है।
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जीएसटी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
व्यापारी और उद्योगपति वर्ग को सबसे ज्यादा मुश्किल अपने लॉग-इन आईडी को ऑपरेट करने में आ रही हैं। जीएसटी से व्यापारी वर्ग व लोगों के जुड़े सवालों के जवाब के लिए एक्साइज डिपार्टमेंट की ओर से दो हेल्पलाइन नंबर शुरू कर दी गई हैं। इसके बावजूद जीएसटी पर लोगों के सवाल और आ रही दिक्कतें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं है।
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जीएसटी
- फोटो : Amar Ujala
बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से 1 जुलाई को देशभर में जीएसटी लागू किया गया था। पहले के मुकाबले जीएसटी को लेकर बेशक लोगों के सवाल थोड़े कम हो गए हों, लेकिन अभी भी जीएसटी पर लोगों के मन में उठ रहे सवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। विभाग की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबर से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा सवाल रियल एस्टेट, रजिस्ट्रेशन और छूट से संबंधित पूछे जा रहे हैं।
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GST impact
कंट्रोल रूम के मुताबिक जब जीएसटी लागू हुआ था, रोजाना 100 से 150 के बीच जीएसटी से संबंधित जानकारी के लिए कॉल आते थे। अभी भी वर्तमान में दिनभर में 40 से 50 के बीच कॉल आ रहे हैं। जिसमें ज्यादातर व्यापारी, उद्योगपति और सर्विस प्रोवाइडर शामिल हैं।
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सवाल, जो अब भी लोगों को कर रहे परेशान
रिटर्न थ्री-बी फाइल करने और सेव करने में आ रही परेशानी। जीएसटी-1, जीएसटी-2 और थ्री-बी फार्म भरने में आ रही दिक्कत। लॉग-इन बनवाते समय अधिकतर लोगों ने अपने चार्टेड अकाउंटेंट व टैक्स कंसल्टेंट की ई-मेल आईडी व फोन नंबर अपडेट कराया था, अब उन लोगों को अपनी ई मेल आईडी व फोन नंबर जीएसटी लॉगइन में अपडेट कराने में दिक्कत आ रही है।
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Chandigarh GST
किस प्रोडक्ट, आइटम या सर्विस पर कितना प्रतिशत जीएसटी है, जीएसटी रेट को लेकर अब भी लोगों में कंफ्यूजन है। कंपोजिशन स्कीम 30 सितंबर के बाद बंद कर दी गई थी, अब कंपोजिशन स्कीम की लिमिट एक करोड़ रुपए कर दी गई है, 6 अक्तूबर से इस स्कीम को फिर से चालू किया गया है, इसको लेकर कई सवाल हैं। वैट से जीएसटी में आने के लिए माइग्रेशन के लिए पैन नंबर वेरिफिकेशन में लोगों को दिक्कत आ रही है।
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Chandigarh GST
नए ट्रेडर्स को जीएसटी नंबर लेने में दिक्कत आ रही हैं, क्योंकि जो पुराने ट्रेडर्स है, उनकी सभी जानकारी विभाग के पास उपलब्ध है, लेकिन जो नए ट्रेडर्स मार्केट में आ रहे हैं, उन्हें जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने में दिक्कत आ रही है, जैसे पैन, आधार कार्ड व अन्य डॉक्यूमेंटेशन वेरिफिकेशन कराने में थोड़ी कठिनाई हो रही है। जीएसटी से कौन सी चीजें सस्ती हुई और कौन सी महंगी।
जीएसटी रिटर्न भरने में लोगों को आ रही दिक्कत, विभाग की ओर से कोई इंतजाम न होना। लोग प्रापर्टी में निवेश करने को लेकर अब भी सवाल कर रहे हैं, क्योंकि जीएसटी लागू होते समय बताया गया था कि प्रापर्टी सस्ती हो जाएगी, लेकिन प्रापर्टी डीलर जीएसटी के नाम पर प्रापर्टी के दाम बढ़ा कर कमाई कर रहे हैं।