पठानकोट एयरबेस कैंप पर हुए आतंकी हमले के कारण 3000 परिवार 4 दिन तक कैद रहे। लगातार हो रही गोलीबारी के बीच उन्हें कहीं जाने की इजाजत नहीं थी। देखिए, ये रिपोर्ट।
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पठानकोट एयरबेस कैंप में 4 दिन तक कैद रहे 3000 परिवार
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25.7 किलोमीटर लंबे पठानकोट एयरबेस के अंदर कई जिंदगियां बंद थीं। इनमें तीन हजार परिवार और 6 देशों से ट्रेनिंग लेने आए सैनिक थे। चार दिन तक जिंदगी और मौत के बीच फंसे लोग ऑपरेशन खत्म होने के बाद एयरफोर्स स्टेशन से बाहर आए।
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एयरबेस पर आतंकी हमले के दौरान वायु सेना कर्मियों के परिवारों ने खुद को क्वार्टरों में ही बंद कर लिया था। खाने-पीने का सामान खत्म हो जाने के बाद भी वह बाहर नहीं निकल सके। हालात सामान्य होने पर इन परिवारों के लिए दूध और राशन की गाड़ियां एयरफोर्स कैंप के अंदर दाखिल हुईं।
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एक एयरफोर्स सैनिक की पत्नी रश्मि ने बताया कि उनके पति की ड्यूटी भी बेस कैंप में लगी हुई थी। इसके कारण पूरा परिवार घबराया हुआ था। उन्होंने कहा कि रोज ग्रेनेड व गोलियों के चलने से उनके बच्चे डरे हुए थे। आखिरकार कई लोग घरों में ताले लगाकर रिश्तेदारों को यहां चले गए।
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ढाकी निवासी गौरव व अविनाश ने बताया कि ढाकी में ही उनकी दुकान है। जब एयरबेस कैंप पर हमला हुआ तो पुलिस व सैनिकों ने पूरे मार्केट को बंद करवा दिया। लोगों ने दुकानों को बंद रखना ही ठीक समझा। उन्होंने बताया कि रोज ग्रेनेड और गोलियों की आवाज आने से लोगों में दहशत थी।
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ढाकी स्थित दुकानदार अशोक मेहता ने बताया कि उनकी दुकान कैंप की दीवार से सटी है। 30 साल से वह यहां दुकान कर रहे हैं अब तक यहां पर हमले की घटना नहीं हुई थी। एक जनवरी को जब वह अपनी दुकान पर बैठे थे तो सैनिकों व पुलिस वालों ने दुकानों को बंद करवाना शुरू कर दिया।